सतुआ बाबा, फोटो- सोशल मीडिया
Magh Mela 2026: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक ऐसे संत की चर्चा है, जो अपनी सादगी के बजाय अपनी लग्जरी और हाईटेक जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं। सतुआ बाबा, जिन्हें सीएम योगी आदित्यनाथ का बेहद करीबी माना जाता है, न केवल अध्यात्म बल्कि सियासी खींचतान के केंद्र में भी आ गए हैं।
प्रयागराज में आयोजित माघ मेले में इन दिनों एक युवा संत सबकी नजरों के केंद्र में हैं। सतुआ बाबा के शिविर के बाहर खड़ी 3 करोड़ रुपये की लैंड रोवर डिफेंडर कार किसी का भी ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। अक्सर रे-बैन के महंगे सनग्लास पहने और हेलिकॉप्टर या हवाई जहाज से यात्रा करने वाले इस संत की जीवनशैली किसी कॉर्पोरेट दिग्गज से कम नहीं लगती। माघ मेले में उन्हें प्रशासन द्वारा सबसे बड़ा भूखंड अलॉट किया गया है, जहाँ उनका भव्य आश्रम स्थापित है।
बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘सतुआ बाबा’ उनका वास्तविक नाम नहीं है। उनका असली नाम संतोष तिवारी (संतोष दास) है और वे उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के रहने वाले हैं। वे वाराणसी स्थित विष्णु स्वामी संप्रदाय की सतुआ बाबा पीठ के 57वें आचार्य हैं। इस संप्रदाय की परंपरा के अनुसार, इसके प्रमुख को ही ‘सतुआ बाबा’ के नाम से संबोधित किया जाता है। संतोष दास ने महज 11 वर्ष की आयु में ही घर त्याग दिया था और अध्यात्म की राह चुन ली थी। उन्हें काशी विश्वनाथ का प्रतिनिधि भी माना जाता है और महाकुंभ-2025 में उन्हें जगतगुरू की पदवी से नवाजा गया था।
सतुआ बाबा को लेकर यूपी की राजनीति में तब उबाल आया, जब प्रयागराज के DM मनीष कुमार वर्मा उनके आश्रम में चूल्हे पर रोटियां सेंकते नजर आए। इस घटना पर तंज कसते हुए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अफसरों को नसीहत दी कि “सतुआ बाबा की रोटी के चक्कर में न पड़ें, फील्ड में काम करें।”
यह विवाद केवल एक टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे योगी आदित्यनाथ और केशव मौर्य के बीच 2017 से चली आ रही पुरानी सियासी खींचतान मानी जा रही है। जहां योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक मंच से सतुआ बाबा के कार्यों की प्रशंसा की और उन्हें समाज को जोड़ने वाला बताया, वहीं मौर्य का बयान इस नजदीकी पर एक कटाक्ष के रूप में देखा गया।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने 10 जनवरी को प्रयागराज में एक समारोह के दौरान सतुआ बाबा का जिक्र करते हुए कहा कि, “सतुआ बाबा अद्भुत काम कर रहे हैं”। उन्होंने एक रहस्यमयी लहजे में यह भी जोड़ा कि जो लोग अभी उनसे नहीं जुड़ रहे हैं, उन्हें अंतिम समय में सतुआ बाबा की शरण में जाना ही होगा, क्योंकि वे काशी में मणिकर्णिका घाट पर बैठते हैं। दरअसल, सतुआ बाबा की पीठ का संबंध मणिकर्णिका घाट से है, जहाँ जीवन का अंतिम संस्कार होता है, और योगी का यह बयान बाबा के आध्यात्मिक प्रभाव और सत्ता में उनकी मजबूती को दर्शाता है।