पुलिस ने रोका, तो सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने फाड़ दिया नोटिस; दलित मुद्दे पर यूपी में गरमाई राजनीति
रामजी लाल सुमन मथुरा के एक दलित उत्पीड़न मामले में पीड़ितों से मिलने के लिए सपा के प्रतिनिधिमंडल के साथ जा रहे थे। लेकिन यूपी पुलिस ने उन्हें कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए मथुरा जाने से मना कर दिया।
- Written By: विकास कुमार उपाध्याय
फोटो सोर्स - वीडियो
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन और यूपी पुलिस के बीच 26 मई दिन सोमवार को एक बार फिर तीखी झड़प देखने को मिली है। आगरा से मथुरा रवाना हो रहे सपा सांसद को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया, जिससे नाराज होकर उन्होंने मौके पर ही पुलिस का नोटिस फाड़कर फेंक दिया।
दरअसल, रामजी लाल सुमन मथुरा के एक दलित उत्पीड़न मामले में पीड़ितों से मिलने के लिए समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के साथ जा रहे थे। लेकिन यूपी पुलिस ने उन्हें कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए मथुरा जाने से मना कर दिया।
गुस्से से लाल सासंद ने भाड़ा पुलिस का नोटिस
पुलिस अधिकारियों ने उनके आगरा स्थित आवास पर पहुंचकर एक लिखित नोटिस सौंपा, जिसमें साफ तौर पर उन्हें मथुरा न जाने की हिदायत दी गई थी। जैसे ही सपा सांसद को यह नोटिस मिला, वे गुस्से से उबल पड़े और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए नोटिस को मौके पर ही फाड़ दिया।
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सपा सांसद रामजी लाल सुमन जी को पुलिस ने मथुरा जाने से रोका तो सांसद जी ने पुलिस के नोटिस को फाड़कर फेंक दिया. #RamjiLalSuman | #Police pic.twitter.com/vyERlm1xJG — Ajay FAUJi अजय फौजी 🇮🇳 (@AjayFaujisp) May 26, 2025
दलितों की आवाज कुचल रही यूपी की भाजपा सरकार, बोले रामजी लाल सुमन
रामजी लाल सुमन ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार दलितों की आवाज को कुचल रही है। आज जब हम पीड़ितों से मिलने जा रहे थे, तो हमें रोक दिया गया। यह सीधा-सीधा लोकतंत्र की हत्या है। सरकार दबंगों के पक्ष में खड़ी है और दलित समाज की उपेक्षा कर रही है।”
सपा सांसद ने आगे कहा कि दलितों पर अत्याचार आज चरम पर है, और जब कोई जनप्रतिनिधि उनके साथ खड़ा होता है, तो उसे भी रोका जा रहा है। ये सरकार अब पूरी तरह दबंगों के मन की सरकार बन चुकी है।
यह पहली बार नहीं है जब रामजी लाल सुमन को नजरबंद किया गया हो या उनके कार्यक्रमों में रुकावट डाली गई हो। इससे पहले भी कई बार उन्हें अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेने से रोका जा चुका है। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम के बाद चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी इस कार्रवाई की निंदा करते हुए सरकार पर निशाना साधा है।
