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Purvanchal Expressway Bus Accident: पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर एक डबल डेकर बस के पलटने से 5 लोगों की मौत और 66 के घायल होने की घटना ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया कि बस में क्षमता से अधिक सवारी, अवैध स्ट्रक्चर और नियमों का घोर उल्लंघन किया गया था।
पंजाब के लुधियाना से दरभंगा बिहार जा रही हरियाणा नंबर की यह डबल डेकर बस बाराबंकी-लखनऊ सीमा के पास अनियंत्रित होकर पलट गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस की रफ्तार करीब 100 किमी प्रति घंटा थी और वह सड़क पर ‘सांप’ की तरह लहरा रही थी। हादसा इतना भीषण था कि बस के पुर्जे 100 मीटर तक बिखर गए और कई यात्री खिड़कियों से बाहर जा गिरे। इस त्रासदी में तीन बच्चों और दो पुरुषों की जान चली गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं।
एआरटीओ (ARTO) की रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। कागजों पर यह बस पूरी तरह फिट थी और इसके सभी दस्तावेज- परमिट, बीमा, टैक्स और प्रदूषण प्रमाणपत्र वैध थे। लेकिन भौतिक जांच में पाया गया कि बस के मूल डिजाइन के साथ खिलवाड़ किया गया था।
• सीटों का अवैध गणित: बस में मूल रूप से केवल 16 स्लीपर और 32 सिटिंग सीटों की अनुमति थी। लेकिन अंदरूनी ढांचे में बदलाव कर 43 स्लीपर सीटें बना दी गई थीं, जबकि सिटिंग सीटें घटाकर सिर्फ 9 कर दी गईं।
• ओवरलोडिंग: बस में क्षमता से कहीं अधिक 90 यात्रियों को बैठाया गया था।
• इमरजेंसी गेट बंद: सबसे गंभीर बात यह रही कि बस के आपातकालीन निकास (इमरजेंसी गेट) के सामने भी अतिरिक्त सीट लगा दी गई थी, जिससे हादसे के वक्त यात्रियों के बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था।
परिवहन नियमों के अनुसार, इतनी लंबी दूरी की यात्रा में बस में दो ड्राइवर होना अनिवार्य है ताकि थकान के कारण होने वाले हादसों को टाला जा सके। लेकिन यह बस पंजाब से बिहार तक का 1360 किलोमीटर का सफर केवल एक ही ड्राइवर के भरोसे तय कर रही थी। मानकों के अनुसार हर 4.5 घंटे की ड्राइविंग के बाद 45 मिनट का ब्रेक और 14 घंटे की ड्यूटी में तीन घंटे का आराम जरूरी है, लेकिन इस मामले में इन नियमों की अनदेखी की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि इस बस पर पहले से ही 67 चालान लंबित थे, जिनका भुगतान नहीं किया गया था। यह बस रास्ते में 50 से अधिक आरटीओ और एआरटीओ क्षेत्रों से होकर गुजरी, लेकिन न तो पुलिस ने और न ही परिवहन विभाग ने इसे रोकने या प्रभावी कार्रवाई करने की जहमत उठाई। यह लापरवाही पूरे सरकारी निगरानी तंत्र पर बड़े सवाल खड़े करती है कि आखिर 67 चालान वाली बस एक्सप्रेसवे पर मौत बनकर कैसे दौड़ती रही?
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वर्तमान में बस की तकनीकी जांच आरआई टेक्निकल टीम द्वारा की जा रही है ताकि ब्रेक और टायर जैसे पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सके। पुलिस ने बिहार निवासी एक पीड़ित महिला की तहरीर पर बस चालक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। यह हादसा याद दिलाता है कि कैसे निजी बस संचालक मुनाफे के लिए यात्रियों की जान जोखिम में डालते हैं और सिस्टम आंखें मूंदकर उन्हें मौका देता है।