सब कुछ प्री-प्लांट था…नोएडा हिंसा में बड़ा खुलासा, चैट्स पढ़ कर आप भी हो जाएंगे हैरान; देखिए यह डिजिटल सबूत
Noida Violence Investigation: नोएडा में हुई हिंसा अब सिर्फ एक सामान्य प्रदर्शन का मामला नहीं रह गया है बल्कि जांच में सामने आ रहे डिजिटल सबूत इसे एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।
- Written By: सजल रघुवंशी
नोएडा हिंसा की चैट्स (सोर्स- डिजाइन इमेज)
Noida Labour Protest Digital Evidence: नोएडा में हुई हिंसा अब सिर्फ एक सामान्य प्रदर्शन का मामला नहीं रह गया है बल्कि जांच में सामने आ रहे डिजिटल सबूत इसे एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। पुलिस को मिले ऑडियो क्लिप, इंस्टाग्राम चैट्स ने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है।
शुरुआती जांच में यह साफ होता जा रहा है कि भीड़ को अचानक नहीं, बल्कि पहले से तैयार रणनीति के तहत जुटाया गया था। अब जांच एजेंसियां इन डिजिटल कड़ियों को जोड़कर पूरी साजिश का पर्दाफाश करने में जुटी हैं।
वायरल ऑडियो क्लिप से बढ़ा शक
जांच के दौरान पुलिस को एक व्हाट्सएप ऑडियो क्लिप मिली है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस ऑडियो में एक व्यक्ति लोगों को इकट्ठा होने और दोबारा जुटने के लिए उकसाता हुआ सुनाई दे रहा है। खास बात यह है कि यह अपील कथित तौर पर लाठीचार्ज के बाद की गई थी जिससे यह संकेत मिलता है कि भीड़ को दोबारा संगठित करने की कोशिश की गई। पुलिस अब इस ऑडियो की सत्यता की जांच कर रही है और इसमें शामिल व्यक्ति की पहचान करने में जुटी है।
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इंस्टाग्राम चैट ने खोले नए राज
जांच में सामने आई एक इंस्टाग्राम चैट ने मामले को और गंभीर बना दिया है। इस चैट में कुछ लोगों को मिर्ची पाउडर लेकर आने के लिए कहा गया था। आशंका जताई जा रही है कि इसका इस्तेमाल पुलिस से बचने या भीड़ को उग्र बनाने के लिए किया जा सकता था। इस तरह की बातचीत यह संकेत देती है कि प्रदर्शन के दौरान नोएडा में हिंसा भड़काने की तैयारी पहले से की जा रही थी। पुलिस अब इस चैट के सोर्स और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
व्हाट्सएप ग्रुप्स में पहले से हो रही थी प्लानिंग
मीडिया रिपोर्टे्स की मानें तो पता चलता है कि पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि हिंसा से करीब तीन दिन पहले ही कई व्हाट्सएप ग्रुप्स सक्रिय हो गए थे। इन ग्रुप्स में लगातार मैसेजिंग के जरिए लोगों को एकजुट करने और रणनीति बनाने का काम किया जा रहा था। जांच एजेंसियों को शक है कि इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए ही भीड़ को उकसाया गया और घटनास्थल तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया गया। अब पुलिस इन ग्रुप्स के एडमिन और मेंबर्स की पहचान करने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग कर रही है।
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सीसीटीवी से बचने की कोशिश भी आई सामने
जांच में एक और अहम खुलासा हुआ है कि कुछ नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने सीसीटीवी कैमरों को निशाना बनाया। आरोप है कि इन लोगों ने कैमरों को तोड़ने या उनकी दिशा बदलने की कोशिश की जिससे उनकी पहचान छुपाई जा सके और सबूत मिटाए जा सकें। इस तरह की हरकतें आमतौर पर योजनाबद्ध अपराधों में देखी जाती हैं। पुलिस अब बचे हुए फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। फिलहाल पुलिस वायरल ऑडियो क्लिप, इंस्टाग्राम चैट और व्हाट्सएप ग्रुप्स के बीच कनेक्शन जोड़कर पूरी साजिश को समझने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल सबूतों के आधार पर जल्द ही आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब कानून-व्यवस्था से बढ़कर एक संगठित साजिश की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है, जिसमें आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं।
