राम मंदिर (सौ.सोशल मीडिया)
President Ayodhya Visit: वासंतिक नवरात्र के साथ गुरुवार से शुरू हो रहे हिंदी नववर्ष के पहले दिन भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का राम मंदिर आगमन निर्धारित है। वह यहां श्रीराम नाम मंदिर और श्रीराम यंत्र स्थापना से जुड़े पूजन कार्यक्रम में भाग लेंगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और विभिन्न प्रकार के पास अस्थायी रूप से स्थगित कर दिए गए हैं। रंगमहल बैरियर का प्रवेश द्वार आमंत्रित अतिथियों के लिए आरक्षित रहेगा, जबकि आम श्रद्धालु भी रामलला के दर्शन कर सकेंगे। दर्शनार्थियों को बिड़ला धर्मशाला के सामने स्थित आदि गुरु रामानंदाचार्य द्वार से प्रवेश दिया जाएगा।
तीर्थ क्षेत्र के महासचिव ने बताया कि गुरुवार को मां अमृतानंदमयी अपने 1100 से अधिक भक्तों के साथ पहुंच चुकी हैं। मंदिर आंदोलन और निधि संकलन से जुड़े आमंत्रित कार्यकर्ताओं का भी आगमन जारी है। अतिथियों को निर्देश दिया गया है कि वे पूर्वाह्न 10 बजे तक कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर अपना स्थान ग्रहण कर लें।
राष्ट्रपति मुर्मु का आगमन पूर्वाह्न 11 बजे निर्धारित है। वह सेना के विमान से महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पहुंचेंगी और वहां से सड़क मार्ग द्वारा राम मंदिर जाएंगी। मंदिर परिसर में प्रवेश के बाद वे सबसे पहले सप्त मंडपम में जाकर रामायण कालीन ऋषियों और पात्रों के दर्शन करेंगी तथा माता शबरी का पूजन करेंगी। इसके बाद वे रामलला के दर्शन कर प्रथम तल पर राम परिवार की आरती करेंगी और मंदिर की भित्ति चित्रों का अवलोकन भी करेंगी। साथ ही श्रीराम यंत्र स्थापना के पूजन में भाग लेकर सभा को संबोधित करेंगी।
इस अवसर पर मां अमृतानंदमयी का आशीर्वाद भी उपस्थित जनों को मिलेगा। कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति अपराह्न तीन बजे तक वापसी करेंगी और उससे पहले मंदिर परिसर में प्रसाद ग्रहण करेंगी। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले भी मौजूद रहेंगे।
राम मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र और श्रीराम नाम की स्वर्णांकित रजत पट्टिका को सप्त दिवसीय अनुष्ठान के बाद स्थापित किया जा चुका है। राष्ट्रपति के पूजन के साथ इस अनुष्ठान की पूर्णाहुति हवन के माध्यम से होगी। पंचधातु से निर्मित और प्राण प्रतिष्ठित श्रीराम यंत्र कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती द्वारा ट्रस्ट को प्रदान किया गया था। इसे कांची मठ और तिरुपति में पूजा के बाद देशभर में रथयात्रा के जरिए अयोध्या लाया गया।
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तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि ने बताया कि दूसरे तल पर राम नाम मंदिर भी स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस में राम नाम की महिमा को सर्वोपरि बताया है। चांदी की इस पट्टिका पर स्वर्ण से ‘श्रीराम’ अंकित किया गया है। सप्त दिवसीय अनुष्ठान के मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्र और उनकी धर्मपत्नी रहे।