राहुल गांधी की 'ब्रिटिश नागरिकता' पर लखनऊ हाईकोर्ट में महा-सुनवाई आज, गृह मंत्रालय की फाइल खोलेगी सियासी राज?

Rahul Gandhi Citizenship Case: राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता मामले में आज लखनऊ हाईकोर्ट में अहम सुनवाई है। गृह मंत्रालय की ओर से गोपनीय फाइल पेश किए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।
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राहुल गांधी, फोटो- सोशल मीडिया
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RaGa British Citizenship Dispute: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में होने वाली एक ऐसी सुनवाई है, जो देश की राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में से एक, राहुल गांधी के भविष्य और उनकी पहचान से जुड़ी है। मामला उनकी कथित ब्रिटिश नागरिकता का है, जिसे लेकर आज केंद्रीय गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स डिवीजन की एक बेहद गोपनीय फाइल कोर्ट की मेज पर हो सकती है।

यह केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि उस शुचिता और नागरिकता के बुनियादी सवाल पर है जो लोकतंत्र की पहली शर्त मानी जाती है। एक आम नागरिक के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर क्यों एक सांसद की नागरिकता को लेकर अदालत के गलियारों में इतनी बड़ी हलचल मची है।

क्या राहुल गांधी के पास है ब्रिटिश पासपोर्ट?

इस पूरे विवाद की जड़ में भारतीय जनता पार्टी के सदस्य विग्नेश शिशिर की वह याचिका है, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिशिर का दावा है कि उनके पास ऐसे पुख्ता साक्ष्य हैं, जो राहुल गांधी की विदेशी नागरिकता की ओर इशारा करते हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि एक भारतीय नागरिक एक साथ किसी दूसरे देश की नागरिकता नहीं रख सकता, और यदि ऐसा है तो यह कानून का बड़ा उल्लंघन है।

पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?

जस्टिस राजीव सिंह की बेंच ने 9 मार्च 2026 को हुई पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राहुल गांधी की नागरिकता से संबंधित अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा और संबंधित फाइलें अदालत के समक्ष पेश की जाएं।

रायबरेली पुलिस से लेकर हाईकोर्ट तक तय किया सफर

मामला केवल नागरिकता की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आपराधिक कार्रवाई की मांग भी शामिल है। विग्नेश शिशिर ने रायबरेली के कोतवाली थाने में राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। इससे पहले, 28 जनवरी 2026 को लखनऊ की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने FIR दर्ज करने की उनकी अर्जी को खारिज कर दिया था। अब इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923, पासपोर्ट एक्ट 1967 और फॉरेनर्स एक्ट 1946 जैसी सख्त धाराओं के तहत मुकदमा चलाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का मानना है कि जो सबूत उन्होंने पेश किए हैं, उनसे एक संज्ञेय अपराध बनता है और इसकी गहन जांच होनी चाहिए।

इतिहास में पहली बार होगा ऐसा

इस केस को 'ऐतिहासिक' माना जा रहा है और खुद याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर ने भी इस पर जोर दिया है। उनका कहना है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में शायद यह पहली बार होगा जब किसी प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़ी इतनी संवेदनशील और गोपनीय फाइल सीधे हाईकोर्ट की मेज पर पहुंचेगी। पिछली सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने भी अदालत में कहा था कि मामले में कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं जो अपराध की श्रेणी में आते हैं।

गृह मंत्रालय के सिटीजनशिप विंग से आने वाली इस फाइल की सुरक्षा को लेकर भी विशेष मांग की गई है। यदि गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर कोई भी विपरीत टिप्पणी होती है, तो यह उनके राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। हालांकि, कांग्रेस और राहुल गांधी के समर्थक इसे राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं, लेकिन अब गेंद अदालत और सरकार के पाले में है।

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