EXPLAINER: कर्क रेखा, शुष्क हवाएं या पथरीली जमीन? बांदा में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के पीछे के 5 असली कारण
Banda Hottest Place in World: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में इन दिनों जानलेवा गर्मी पड़ रही है। यहां का तापमान 47 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर गया, जिसने इससे दुनिया का सबसे गर्म स्थान बना दिया है।
- Written By: अक्षय साहू
बांदा में भीषण गर्मी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Banda Heat Fatal: उत्तर प्रदेश का बांदा जिला इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका कारण है इलाके में पड़ रही भीषण गर्मी जिसने पूराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए है। पिछले 8-10 दिनों में बांदा न सिर्फ भारत का बल्कि पूरी दुनिया का सबसे गर्म शहर रहा है। इस बार यहां तापमान 47 डिग्री के पार पहुंच चुका है। बुंदेलखंड में गर्मी पड़ना नई बात नहीं है, लेकिन जितनी गर्मी इस बार पड़ रही है आमतौर पर इतनी गर्मी राजस्थान के चुरू में देखी जाती है।
बांदा में हो रही इस गर्मी ने स्थानीय लोगों की पहले से चली आ रही समस्याओं को और बढ़ा दिया है। इसके अलावा मौसम वैज्ञानिक लगातार यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इस समस्या के पीछे असल कारण क्या है और इससे कैसे निपटा जा सकता है। आइए आपको बताते हैं कि बांदा में इस रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की कारण क्या है? और भयंकर गर्मी से कैसे बचा जा सकता है?
गर्मी ने बांदा में तोड़ पुराने रिकॉर्ड
बांदा जिला उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में स्थित है। यह इलाका पहले से ही अपनी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और सूखे के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार स्थिती पहले के मुकाबले कठीन और अलग है। हाल के दिनों में यहां का तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस को भी पार गया है। अप्रैल में ही यहां का न्यूनतम तापमान 31 डिग्री तक पहुंच गया था जिसने साफ कर दिया था कि स्थिती चिंता जनक होने हो सकती है।
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बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिनेश साह ने आशंका जताई है कि मई और जून में तापमान और अधिक बढ़ सकता है। फिलहाल, 46 से 47 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी ने इलाके में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। दिन हो या रातलोगों को गर्मी से निजात नहीं मिल पा रही है। हालात इतने खराब हैं कि लोगों ने दोपहर में अपने घरों से निकलना बंद कर दिया है। वहीं प्रशासन ने भी लोगों से दोपहर में बाहर न निकलने की अपील की है।
बांदा में क्यों इतनी गर्मी पड़ रही है?
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएं तापमान के बढ़ने का मुख्य कारण हैं। इसके अलावा, क्षोभमंडल (Troposphere) में नीचे से उठने वाली गर्म हवाएं ऊपर नहीं जा पाती है, जिससे गर्मी जमीनी के पास ही बनी रहती है। साथ ही, इस इलाके में अधिकतर समय साफ रहने वाला मौसम भी भीषण गर्मी के लिए जिम्मेदार है। विशेषज्ञों के मुताबिक, साफ आसमान और बादलों की कमी के कारण इस इलाके में सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं, जो तापमान के तेजी से बढ़ने का बड़ा कारण है।
टेंपरेचर इनवर्जन के कारण बांदा में पड़ रही भीषण गर्मी (IA जनरेटेड फोटो)
इसके अलावा बांदा की भौगोलिक स्थिती भी इलाके में पड़ने वाली गर्मी के लिए जिम्मेदार है। बांदा कर्क रेखा के पास बसा है। जहां सूरज की किरणें सबसे तेज और अधिक समय तक पड़ती हैं। साथ ही यहां की मिट्टी सूखी है और नमी की कमी है। साथ ही बुंदेलखंड के अधिकतर इलाके में पेड़-पौधों की कमी है, इसके अलावा जमीन पर पत्थरीली सतह के कारण इलाका जल्दी की गर्म हो जाता है और जिसे ठंडा होने में दूसरे इलाकों से अधिक समय लगता है।
भारत के किन इलाकों में होती भीषण गर्मी?
भारत के गर्म स्थानों की बात की जाए तो आंकड़ो के अनुसार, राजस्थान का फलोदी को भारत का सबसे गर्म इलाका माना जाता है। यहां मई 2016 में अधिकतम तापमान 51 डिग्री तक पहुंच गया था। हालांकि बांदा का अधिकतम तापमान 47.6 डिग्री तक पहुंचा है। लेकिन इसके बाद भी इसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है।
पिछले पांच सालों में बांदा में गर्मी के मौसम में तापमान की बात करें तो यह औसतन 45 डिग्री सेल्सियस आसपास रहा है। वहीं इस बार पिछले 10 दिनों में तापमान 44 से 47 डिग्री के बीच बना रहा। हालांकि इस बीच हुई बंदूबंदी ने लोगों को थोड़ी बहुत राहत जरूर पहुंचाई है।
बुंदेलखंड के बाकी जिलो का हाल
बुंदेलखंड के बाकी जिलों की बात करें तो बांदा के आसपास हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट और प्रयागराज जिले हैं। लेकिन इस बार यहां भी भीषण गर्मी पड़ रही है। वहीं राजस्थान के श्रीगंगानगर, जैसलमेर, बीकानेर और बाड़मेर भी अत्यधिक गर्म क्षेत्रों में शामिल हैं। इसके अलावा ओडिशा का टिटलागढ़ और महाराष्ट्र का अकोला भी गर्म इलाकों में गिना जाते हैं।
बांदा में सूखे का इतिहास
बुंदेलखंड में सूखा एक बड़ी समस्या है। बांदा का भी एक भी एक सूखा प्रभावित जिला है। 1991, 1992, 2007, 2009, 2014, 2015 और 2016 में यहां गंभीर सूखा पड़ा था। जिसने इलाके के किसानों के लिए बड़ी समस्या खड़ी की थी। सरकार इस इलाकें में कई योजनाए चला कर स्थिती संभालने की लगातार कोशिश कर रही है, लेकिन स्थिती में कुछ खास बदलाव नहीं आया है यहां हर 3-4 साल में सुखा देखने को मिल जाता है।
बांदा में सूखे का लंबा इतिहास है (सोर्स- सोशल मीडिया)
लोग कैसे करते हैं बचाव?
भीषण गर्मी से बचने के लिए लोग दिन में खुद को ढककर ही बाहर निकलते हैं और अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं जाते। प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का भी पालन किया जाता है। विशेषज्ञ हर आधे घंटे में पानी पीने की सलाह देते हैं। साथ ही ओआरएस, ग्लूकोज, छाछ, नींबू पानी या नारियल का पानी भी गर्मी से राहत दिला सकता है। अधिक गर्मी वाले इलाके में लोगों को चाय, कॉफी और शराब से दूर रहना चाहिए।
गर्मी से बचाव के तरीके (AI जनरेटर फोटो)
इलाके में लू खतरा और बारिश की स्थिती
भारत में पिछले साल लू से करीब 455 मौतें हुई थीं। बांदा जैसे क्षेत्रों में हर साल लू के कारण स्वास्थ्य समस्याएं और मौतों के मामले सामने आते हैं, हालांकि, आधिकारिक आंकड़े अक्सर कम बताए जाते हैं।
इसके अलावा बांदा में कम बारिश का होना भी गर्मी का बड़ा कारण है। यहां सालना औसतन बारिश 850 से 902 मिमी के बीच होती है, इसमें करीब 80% बारिश जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून में होती है।
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गर्मी से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारी
बांदा के डीएम अमित आसेरी के मुताबिक, प्रशासन जिले में गर्मी से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है। जिले में गर्मी से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है और सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा सरकार ने लोगों से अपील की है कि दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक धूप में बाहर न निकलें। साथ ही, पशु-पक्षियों के लिए भी पानी की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि वे भी इस भीषण गर्मी से बच सकें।
