

Prayagraj MD Drug Factory Case: मांडा के पहाड़ी क्षेत्र स्थित कोसड़ा कला गांव में फूलों की खेती की आड़ में संचालित की जा रही मेथामफेटामाइन (एमडी) ड्रग्स फैक्ट्री का मामला अब राष्ट्रीय स्तर की जांच के दायरे में पहुंच गया है। तस्करों का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला होने की जानकारी सामने आने के बाद दिल्ली से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की टीम प्रयागराज पहुंची है। टीम फैक्ट्री, उससे जुड़े लोगों और ड्रग्स की सप्लाई चेन से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों की पड़ताल करेगी।
जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने मांडा में करीब 11 महीने की लीज पर जमीन लेकर वहां टिनशेड डाला था। बाहर से इस जगह पर फूलों की खेती होती दिखाई देती थी, लेकिन इसी की आड़ में टिनशेड के भीतर एमडी ड्रग्स का निर्माण किया जा रहा था। पुलिस की कार्रवाई के बाद फैक्ट्री का खुलासा हुआ और मामले में कई अहम जानकारियां जांच एजेंसियों के सामने आई हैं।
फैक्ट्री के लिए जमीन उपलब्ध कराने वाले खेत मालिक के बेटे की भूमिका भी जांच के घेरे में है। बताया गया है कि खेत मालिक का बेटा मुंबई में था और इसी दौरान उसकी तस्करों से मुलाकात हुई थी। इसके बाद मांडा में जमीन लीज पर लिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन लेने और फैक्ट्री संचालित करने में उसकी भूमिका किस स्तर तक थी। इसी आधार पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
जांच में एमडी ड्रग्स की सप्लाई के तार मुंबई, पुणे, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। इससे पूरे मामले को केवल स्थानीय स्तर की ड्रग्स फैक्ट्री तक सीमित नहीं माना जा रहा है। गिरफ्तार आरोपित रजनीश मिश्रा और शिवधन मिश्रा से पूछताछ के आधार पर सप्लाई नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। तस्करी का सिंडिकेट अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़ा होने की आशंका के बीच दिल्ली एनसीबी की टीम महत्वपूर्ण तथ्यों और साक्ष्यों को जुटाने में लगी है।