

Allahabad High Court Suo Motu Cognizance: संगम नगरी में पिछले दो दिन से हो रही लगातार बारिश ने नगर निगम की तैयारियों और जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्मार्ट सिटी के नाम पर हुए विकास कार्यों की पोल बरसात की पानी ने खोल दिया । शहर के कई इलाके जलमग्न हैं। सड़कों पर पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रामबाग रेलवे स्टेशन परिसर भी पानी में डूब गया, जिससे यात्रियों को खासी दिक्कतें हुईं।
शहर में जलभराव की गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गिरीश प्रसाद की खंडपीठ ने प्रयागराज में जलभराव मामले पर सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि निचले इलाकों में जलभराव रोकने के लिए पहले से प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। कोर्ट ने नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जलनिकासी की व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा है।
लगातार बारिश और जलभराव को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रयागराज में 12वीं कक्षा तक के सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया है। मगलवार को करीब 160 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, मौसम विभाग ने 24 अगस्त तक बारिश का क्रम जारी रहने की संभावना जताई है।
जलभराव का असर नगर निगम के कार्यालय परिसर तक पहुंच गया। नगर आयुक्त के सरकारी आवास में भी पानी घुस गया। कई प्रमुख मार्गों, गलियों और मोहल्लों में घुटनों तक पानी भरने की स्थिति सामने आई। इससे लोगों को घरों से निकलने में परेशानी हुई।
नगर निगम की ओर से नाला सफाई और जलनिकासी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावों के बावजूद शहर में जलभराव की स्थिति ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय से नालों की सफाई और जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़कों और घरों में घुस रहा है।
जलभराव को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर पार्षदों ने भी सवाल उठाए हैं। पार्षदों का कहना है कि अधिकारियों से शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। कई पार्षदों ने नगर निगम की बैठकों में समस्या उठाते हुए स्थायी समाधान की मांग की।
रामबाग रेलवे स्टेशन परिसर में पानी भरने से यात्रियों को परेशानी हुई। पटरियों के आसपास जलभराव के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। वहीं, व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन कर जवाबदेही तय करने की मांग की।
हाईकोर्ट ने जलभराव रोकने के लिए पूर्व में किए गए उपायों और वर्तमान व्यवस्था की जानकारी मांगी है। अधिकारियों को शपथपत्र दाखिल कर जलभराव रोकने के लिए स्वीकृत योजनाओं और उठाए गए कदमों का विवरण देने का निर्देश भी दिया गया है। अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम और जिला प्रशासन के सामने शहर को जलभराव से राहत दिलाने की बड़ी चुनौती है।