इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व स्थायी अधिवक्ता पर फर्जी डिग्री से वकालत का आरोप, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

Fake Degree Case: हाईकोर्ट के पूर्व स्थायी अधिवक्ता की कानून की डिग्री फर्जी पाए जाने पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस विश्वविद्यालय की मान्यता और डिग्री जारी करने की प्रक्रिया की जांच कर रही है।
Former Standing Counsel Accused of Practising Law with Fake Degree, FIR Registered
इलाहाबाद हाईकोर्ट(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Allahabad High Court Fake Degree Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एक पूर्व स्थायी अधिवक्ता की कानून की डिग्री भी फर्जी पाई गई है। फर्जी डिग्री के आधार पर वकालत करने के आरोप में उनके खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस कार्रवाई के साथ ही फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर वकालत करने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ चल रही जांच का दायरा और बढ़ गया है।

अब तक 100 फर्जी डिग्रीधारी वकीलों के खिलाफ मुकदमे दर्ज

बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव आरके शुक्ला की तहरीर पर सिविल लाइंस थाने में अब तक करीब 100 फर्जी डिग्रीधारी वकीलों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों के नामजद अधिवक्ता शामिल हैं।

कोर्ट के आदेश पर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की ओर से पंजीकृत सभी अधिवक्ताओं के शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया था। सत्यापन के दौरान अलग-अलग विश्वविद्यालयों से अलग-अलग समय पर डिग्री हासिल करने वाले तमाम अधिवक्ताओं के दस्तावेजों की जांच की गई। इसी प्रक्रिया में पूर्व स्थायी अधिवक्ता की डिग्री भी फर्जी पाई गई।

डिग्री जारी करने वाले विश्वविद्यालय की होगी जांच

पुलिस अब यह भी जांच करेगी कि संबंधित डिग्री जिस विश्वविद्यालय से जारी होने का दावा किया गया है, उसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मान्यता प्राप्त थी या नहीं। इसके साथ ही डिग्री जारी करने वाले विश्वविद्यालय और वहां कार्यरत संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। पुलिस का कहना है कि यदि किसी विश्वविद्यालय के पास मान्यता नहीं होने का तथ्य सामने आता है तो उसके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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इस्तीफा देने वाले स्थायी अधिवक्ताओं पर भी लगे आरोप

इस मामले में बार काउंसिल की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और डिग्रियों के साथ संबंधित विश्वविद्यालयों से प्राप्त अभिलेखों को भी जांच का आधार बनाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि फर्जी डिग्री के आरोप में नामजद सभी मामलों की विवेचना शुरू कर दी गई है।

गौरतलब है कि फर्जी डिग्री के आरोपों की जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि नामजद वकीलों में एक अधिवक्ता ऐसे हैं, जो स्थायी अधिवक्ता रह चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। पुलिस इस मामले में सभी तथ्यों और साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी

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