

Allahabad HC Rejects Umar bail: प्रयागराज से बड़ी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माफिया अतीक अहमद के बड़े बेटे उमर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला साल 2023 में खुल्दाबाद थाने में दर्ज एफआईआर का है।
बता दें, प्रयागराज के माफिया अतीक अहमद के बड़े बेटे मोहम्मद उमर के खिलाफ खुल्दाबाद थाने में साल 2023 में मारपीट, अपहरण के साथ-साथ रंगदारी मांगने का FIR दर्ज किया गया था। इसी मामले में जमानत वाली याचिका पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने उमर के अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दिया।
पुलिस FIR के अनुसार, मोहम्मद उमर के साथ अन्य आरोपियों पर मारपीट करने, 1 करोड़ 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगने, जान से मारने की धमकी देने और अपहरण करने का आरोप लगाया गया था। पुलिसन ने सभी आरोपियों पर आईपीसी की 307, 147, 386, 364, 506 और 504 के तहत मामला दर्ज किया था।
इस मामले में अतीक के बेटे मोहम्मद उमर के अलावा अन्य आरोपियों में एहतेशाम करीम, अजय, अली अहमद, असाद कालिया और मोहम्मद नसरत भी शामिल थे। फिलहाल मोहम्मद उमर राजधानी लखनऊ की जेल में बंद है।
बता दें, माफिया अतीक अहमद के फाइनेंसर और बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम ने ही मोहम्मद उमर के खिलाफ यह एफआईआर दर्ज कराई थी। 26 अप्रैल 2023 को प्रयागराज के खुल्दाबाद थाने में यह मुकदमा दर्ज कराया गया था।
पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे चकिया चौराहे से जबरन गाड़ी में बैठाकर अतीक अहमद के चकिया स्थित कार्यालय ले जाया गया। वहां उसके साथ मारपीट की गई और उसे धमकाया गया। शिकायत में धूमनगंज के देवघाट स्थित जमीन को उमर और अली के नाम करने के लिए दबाव डालने का भी आरोप लगाया गया था।
मामले की शुरुआती रिपोर्टों में आरोप था कि जमीन अपने नाम कराने के लिए दबाव बनाने के साथ बिल्डर से पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। बाद की कार्रवाई में रंगदारी और अपहरण से जुड़े आरोपों को लेकर पुलिस ने उमर, अली समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की थी। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने डर के कारण अतीक के करीबी असद कालिया को 1.20 करोड़ रुपये देने का भी आरोप लगाया था।
इस मामले में उमर को पहले भी जिला अदालत से राहत नहीं मिली थी। नवंबर 2024 में प्रयागराज की अदालत ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। अभियोजन की ओर से आरोपों की गंभीरता और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का हवाला दिया गया था। उमर ने खुद को निर्दोष बताते हुए राजनीतिक साजिश के तहत फंसाए जाने की दलील दी थी, लेकिन अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया था।
मोहम्मद उमर फिलहाल लखनऊ जेल में बंद है। उसके खिलाफ इस मामले के अलावा अन्य आपराधिक मामलों में भी कार्रवाई चल रही है। उमेश पाल हत्याकांड से जुड़े मामले में भी उमर को आरोपी बनाया गया है। हाल में उसके छोटे भाई आबान की सड़क हादसे में मौत के बाद हाईकोर्ट ने उमर और अली को कड़ी शर्तों के साथ अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सीमित अवधि की पैरोल दी थी।
हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद रंगदारी और धमकी के इस मामले में उमर की जेल से रिहाई की उम्मीदों को फिलहाल झटका लगा है।