

Child Welfare Paramount Custody Case: बच्चों के अभिरक्षा से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आठ वर्षीय बच्ची की अभिरक्षा से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चे के भविष्य, शिक्षा और सुरक्षा का हित सर्वोपरि है। केवल मासूम बच्चे की इच्छा के आधार पर उसकी अभिरक्षा का फैसला नहीं किया जा सकता।
मामले में याचिकाकर्ता बच्ची के प्राकृतिक पिता हैं और राजस्थान में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। बेटी के जन्म के तुरंत बाद ही याची की पहली पत्नी की मौत हो गई थी। ऐसे में बच्ची अपने नाना-नानी के साथ रह रही थी। पहली पत्नी के निधन के बाद उन्होंने दूसरा विवाह किया। उनका कहना था कि उनकी आर्थिक और पारिवारिक स्थिति बच्ची के पालन-पोषण और बेहतर भविष्य के लिए अनुकूल है।
बच्ची की मां के निधन के बाद से वह अपने नाना-नानी के साथ रह रही है। बच्ची का उनसे गहरा भावनात्मक लगाव है। नाना-नानी का कहना था कि वे बच्ची की देखभाल करते आ रहे हैं और उसे अपने पास रखकर बेहतर माहौल देने में सक्षम हैं।
न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने बच्ची, उसके पिता और पिता की दूसरी पत्नी से व्यक्तिगत बातचीत की। कोर्ट ने पाया कि नाना-नानी की उम्र 67 और 65 वर्ष है तथा दोनों सेवानिवृत्त हैं। अदालत ने माना कि पिता और उनकी दूसरी पत्नी बच्ची को बेहतर माहौल देने में सक्षम हैं।
पीठ ने कहा कि बच्ची के हित में उसकी अभिरक्षा उसके पिता के पास रहनी चाहिए। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बच्ची को पिता को सौंपने का आदेश दिया, साथ ही नाना-नानी को बच्ची से नियमित रूप से मिलने की सुविधा देने के निर्देश दिए।