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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आगे झुका मेला प्रशासन, माफी मांगने को तैयार…लेकिन शंकराचार्य ने रख दी शर्त!

Magh Mela Controversy: माघ मेले में विवाद तब बढ़ा जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अचानक प्रयागराज छोड़कर वाराणसी लौट गए। प्रशासन मानकर चल रहा था कि वे पूर्णिमा तक रुकेंगे और मना लिए जाएंगे।

  • Written By: अर्पित शुक्ला
Updated On: Jan 30, 2026 | 11:04 AM

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Image- Social Media)

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Shankaracharya Controversy: इस बार माघ मेले में एक बड़ा धार्मिक‑प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार के अनुसार, प्रयागराज प्रशासन अब शंकराचार्य से माफी मांगने को तैयार है।

स्थिति तब बिगड़ी जब शंकराचार्य ने अचानक माघ मेला छोड़कर वाराणसी लौटने का फैसला किया। प्रशासन को पूरी उम्मीद थी कि वे माघ पूर्णिमा (1 फरवरी) तक मेले में रहेंगे, ताकि किसी तरह उन्हें मनाया जा सके। लेकिन 28 जनवरी को उनका अचानक प्रस्थान प्रशासन के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और शर्तें

वाराणसी पहुंचने के बाद लखनऊ के दो वरिष्ठ अधिकारी शंकराचार्य से संपर्क में आए और आग्रह किया कि उन्हें पूर्णिमा के दिन प्रयागराज लाकर ससम्मान स्नान करवाया जाएगा। शंकराचार्य ने इसके लिए दो शर्तें रखी हैं, जिम्मेदार अधिकारी लिखित में माफी मांगे। माघ मेला, कुंभ और महाकुंभ में चारों शंकराचार्यों के लिए प्रोटोकॉल तय और घोषित किया जाए। शंकराचार्य ने फिलहाल यह स्पष्ट किया है कि उनकी स्नान योजना वाराणसी में ही है, हालांकि प्रशासन लगातार प्रयाग लौटने का अनुरोध कर रहा है।

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क्यों हुआ विवाद?

शंकराचार्य पक्ष का कहना है कि 27 जनवरी को प्रशासन ने उनसे संपर्क किया, लेकिन माफी देने या लिखित खेद व्यक्त करने में देरी की गई। इससे आहत होकर उन्होंने माघ मेला क्षेत्र छोड़ने का निर्णय लिया। प्रयागराज में प्रवेश के दौरान भी विवाद हुआ था। मौनी अमावस्या के पवित्र स्नान के लिए शंकराचार्य रथ/पालकी के साथ संगम की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से रथ से उतरकर पैदल जाने को कहा। समर्थक रथ आगे बढ़ाने पर अड़े, जिससे पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का‑मुक्की हुई।

यह भी पढ़ें- ‘अयोध्या सीट पर पहला हक…’, बृज भूषण शरण सिंह ने भरी तगड़ी हुंकार, UGC नियम और CM योगी को लेकर दिया बड़ा बयान

शंकराचार्य का आरोप है कि उन्हें संगम नोज तक जाने से रोका गया और बदसलूकी हुई, जिसके चलते उन्होंने मौनी अमावस्या पर स्नान करने से इनकार किया। आज शंकराचार्य की प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ होगा कि वे प्रशासन की पेशकश स्वीकार करेंगे या नहीं। यह भी स्पष्ट होगा कि माघ पूर्णिमा पर संगम स्नान होगा या वे वाराणसी में ही रहेंगे।

💡

Frequently Asked Questions

  • Que: माघ मेले में शंकराचार्य विवाद क्यों शुरू हुआ?

    Ans: माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपना पारंपरिक संगम स्नान पूरा नहीं कर पाने पर प्रशासन से टकराव किया। 18 जनवरी 2026 को उनके पालकी (पलकी) को पुलिस ने भारी भीड़ के कारण रोक दिया था और उन्हें पैदल आगे जाने को कहा, जिससे विवाद बढ़ गया और बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ।

  • Que: शंकराचार्य ने माघ मेले से क्यों वापस लौटने का निर्णय लिया?

    Ans: शंकराचार्य ने करीब 10 दिनों का धरना और विरोध प्रदर्शन के बाद माघ मेले से संताप भरा निर्णय लेते हुए लौटने का निर्णय लिया, क्योंकि उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें सम्मान और परंपरा के अनुरूप संगम स्नान नहीं करने दिया और माफी भी नहीं दी। इसलिए वे बिना स्नान के प्रयागराज छोड़कर काशी के लिए रवाना हो गए।

  • Que: प्रशासन ने शंकराचार्य के लौटने के बाद क्या प्रतिक्रिया दी?

    Ans: प्रशासन ने वाराणसी पहुंचने के बाद शंकराचार्य से संपर्क किया और आग्रह किया कि वे माघ पूर्णिमा (1 फरवरी) को प्रयागराज लौटकर संगम स्नान करें। शंकराचार्य ने इसके लिए दो शर्तें रखीं: जिम्मेदार अधिकारी लिखित में माफी मांगें। माघ मेले, कुंभ और महाकुंभ में चारों शंकराचार्यों के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल घोषित हो। अभी उनकी स्नान योजना वाराणसी में ही है, लेकिन प्रशासन लगातार उन्हें प्रयागराज लौटने का अनुरोध कर रहा है।

Prayagraj controversy mela administration will apologize to shankaracharya avimukteshwarananda

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Published On: Jan 30, 2026 | 11:04 AM

Topics:  

  • Prayagraj
  • Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand

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