शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: शंकराचार्य घाट पर मनेगा नव संवत्सर उत्सव, जगदगुरु करेंगे सनातनी पंचांग का विमोचन
Nav Samvatsar celebration Varanasi: काशी में 18 मार्च 2026 को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी का भव्य स्वागत होगा। नवरात्र में विशेष पूजन, साधना और नव संवत्सरोत्सव का आयोजन होगा।
- Written By: अक्षय साहू
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (सोर्स- सोशल मीडिया)
Shankaracharya Avimukteshwaranand Kashi Visit 2026: मोक्षदायिनी काशी की धरती फिर से आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाएगी। ‘गौप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद’ के सफल आयोजन के बाद, ज्योतिषपीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार, 18 मार्च 2026 को काशी आने वाले हैं। छत्तीसगढ़ से प्रयागराज होते हुए उनका स्वागत किया जाएगा। सनातनी जनता और गौभक्त पुष्पवर्षा और जयघोष के साथ उन्हें भव्य स्वागत करेंगे।
श्रीविद्यामठ में होगा चरण पादुका पूजन
काशी पहुंचते ही शंकराचार्य जी सबसे पहले श्रीविद्यामठ में चरण पादुका पूजन करेंगे। उनके मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय के अनुसार, भक्तगण विधिपूर्वक महाराज श्री की चरण पादुका का पूजन और वंदन करेंगे। यह आगमन खास है क्योंकि पूरे चैत्र नवरात्र के दौरान शंकराचार्य जी के मार्गदर्शन में कई धार्मिक और मांगलिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।
नव संवत्सरोत्सव पर सनातनी पंचांग का विमोचन
19 मार्च को, चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा पर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती घाट पर नव संवत्सरोत्सव का आयोजन होगा। इस शुभ अवसर पर जगदगुरु शंकराचार्य जी सनातनी पंचांग का विमोचन करेंगे। इसके साथ ही प्रातर्मंगलम् के 20वें वार्षिकोत्सव के मौके पर बटुक विद्यार्थियों द्वारा नव वर्ष का पहला सूर्य अर्घ्य दिया जाएगा। इसी अवसर पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी।
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आध्यात्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला
नवरात्र के दौरान महाराज श्री के मार्गदर्शन में भगवती के विशेष पूजन और साधना के कार्यक्रम होंगे। काशी के विद्वानों और बटुक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ सनातनी नव वर्ष का स्वागत किया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल धार्मिक है, बल्कि गौ संरक्षण और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार को भी बढ़ावा देना है।
इस प्रकार, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी का आगमन काशी में आध्यात्मिक उत्साह और धार्मिक अनुशासन को नए आयाम देगा। भक्तजन इस पावन अवसर पर भाग लेकर अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और सांस्कृतिक चेतना को महसूस करेंगे।
