अलंकार अग्निहोत्री। इमेज-सोशल मीडिया
SC ST Act Protest News : उत्तर प्रदेश के पीसीएस (PCS) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री इन दिनों एक बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट को लेकर सुर्खियों में हैं। बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट रहे अग्निहोत्री ने SC-ST एक्ट को देश का सबसे विभाजनकारी कानून करार देते हुए इसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। हाल ही में वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से आशीर्वाद लेने के बाद उन्होंने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी जाति के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज में गिरते भरोसे और संतुलन को बचाने की है।
अलंकार अग्निहोत्री का तर्क है कि पिछले 35 वर्षों से यह कानून सामाजिक तनाव और अविश्वास का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। उनके अनुसार कानून का मकसद संरक्षण देना होना चाहिए था, लेकिन वर्तमान में इसका दुरुपयोग इतना बढ़ गया है कि महज आरोप लगते कानूनी प्रक्रिया एक सजा बन जाती है। वे दावा करते हैं कि देश की 85% आबादी इस कानून के मौजूदा स्वरूप से असंतुष्ट है और सामान्य व ओबीसी वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है।
अलंकार अग्निहोत्री ने देश की नई न्याय संहिता (BNS और BNSS) का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब हमारे पास अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त और व्यापक कानून मौजूद हैं तो अलग-अलग वर्गों के लिए विशेष कानूनों की क्या जरूरत है? उनका मानना है कि इस तरह के विशेषाधिकार समाज में ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं। साथ ही उन्होंने यूजीसी के नए रेगुलेशन को भी सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया और कहा कि सरकार को जमीनी हकीकत समझकर नीतियां बनानी चाहिए।
अग्निहोत्री ने सरकार को 6 फरवरी तक का समय दिया है। उनकी मांग है कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस कानून को तत्काल प्रभाव से खत्म किया जाए। ऐसा नहीं होता है तो 7 फरवरी से देशभर के लोग दिल्ली कूच करेंगे। जब उनसे राजनीतिक महत्वाकांक्षा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मेरी राजनीतिक आकांक्षा नहीं है। होती तो मैं बंद कमरों में बैठकों में होता, सड़कों पर नहीं। मेरा एक ही लक्ष्य है-राष्ट्र का कल्याण और न्यायपूर्ण नीतियों का निर्माण। उन्होंने विश्वास दिलाया है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन इसका असर व्यापक होगा। उन्होंने इसे नीति सुधार की दिशा में बड़ी शुरुआत बताया है।