अमेठी. भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) का जन्मदिन (Birthday) हिन्दू महीना (Hindu Month) भाद्रपद की अष्टमी को आता है इस दिन को जन्माष्टमी (Janmashtami) कहते हैं। जन्माष्टमी के मौके पर देश भर के कृष्ण मंदिरों में विशेष प्रकार की रौनक देखने को मिलती है। प्रत्येक मंदिर की अपनी कुछ न कुछ खास विशेषता है। भगवान कृष्ण से जुड़ा ऐसा ही एक प्राचीन मंदिर उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में है जो वर्षों से आस्था का केंद्र बना हुआ है।
अमेठी जिले के जामो क्षेत्र में पड़ने वाले नंद महर धाम को लेकर मान्यताएं अलग-अलग हैं लेकिन एक बात पर सभी सहमत हैं कि कभी न कभी नंद बाबा भगवान श्री कृष्ण और बलराम के साथ यहां आए थे। यहाँ के निवासी बताते हैं कि बाबा नंद कृष्ण और बलराम के साथ रामलला के दर्शन को अयोध्या जाते समय यहां रुक कर विश्राम किया था। बाबा नंद के इस धाम पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर जिले ही नहीं बल्कि कई जिलों के यदुवंशियों का जमावड़ा होता है और कई दिनों तक भव्य मेले का आयोजन होता है। यही वजह है कि नंद महर के मेले को भी यादवों का महाकुंभ कहा जाता है।
बताया जाता है कि यहां की मान्यता है की दर्शन मात्र से भूत प्रेत बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इसलिए देश के कोने-कोने से लोग यहां आते हैं। प्रत्येक सप्ताह में मंगलवार और कृष्ण जन्माष्टमी के दिन नंदमहर धाम पर आस्था वान लोग दर्शन के लिए आते है। गाय और भैंस के बच्चा देने के बाद सर्वप्रथम दूध को इस नंद महर धाम पर चढ़ाने की भी परंपरा है।स्थानीय लोग बताते है यहाँ अब तक पूर्व पीएम स्व. राजीव गांधी और यूपी के कई पूर्व मुख्यमंत्री भी नंद महर धाम में मत्था टेक चुके हैं।