PhD प्रबंध अस्वीकार: डिग्री विवाद पहुंचा कोर्ट, HC ने मराठवाड़ा विश्वविद्यालय को किया नोटिस जारी
DBAMU PhD Thesis Rejection: मराठवाड़ा विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी प्रबंध अस्वीकार किए जाने पर शोधार्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। अदालत ने विश्वविद्यालय व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Bombay High Court University Dispute: छत्रपति संभाजीनगर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी प्रबंध स्वीकार करने से इनकार किए जाने के निर्णय को चुनौती देते हुए मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका दायर की गई है।
इस याचिका पर न्यायमूर्ति विभा कंकणवाड़ी और न्यायमूर्ति हितेन बेनेगांवकर की खंडपीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता अम्रपाली दौलत आमराव ने याचिका में कहा है कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी परिपत्रों के अनुसार और निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी शैक्षणिक शर्तें पूरी करने के बावजूद उनके पीएचडी प्रबंध को स्वीकार नहीं किया गया, आमराव ने वर्ष 2014 में पालि एवं बौद्ध अध्ययन विषय में पीएचडी शोध के लिए पंजीकरण कराया था।
उस समय लागू विश्वविद्यालय अध्यादेश के अनुसार पीएचडी पूर्ण करने के लिए अधिकतम आठ वर्ष की अवधि निधर्धारित थी और प्री पीएचडी मौखिक परीक्षा का प्रमाणपत्र अनिवार्य नहीं था।
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कोविड-19 काल के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार प्रबंध प्रस्तुति की अवधि में भी विस्तार दिया गया था। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि शोध मार्गदर्शक के निधन के कारण शोध कार्य में विलंब हुआ।
अवकाश के चलते प्रबंध प्रस्तुत नहीं हो सका
याचिकाकर्ता की प्री-पीएचडी मौखिक परीक्षा 24 मार्च 2025 को हुई मी, जिसमें कुछ संशोधन सुझाए गए थे। 31 मार्च 2025 को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण प्रबंध प्रस्तुत करना संभव नहीं हो पाया, याचिका में यह भी कहा गया है कि दंड एवं आवश्यक शुल्क भरने की तैयारी होने के बावजूद विश्वविद्यालय ने प्रबंध स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
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इस प्रकरण में खंडपीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 18 फरवरी को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिरीष कांबले तथा शासन की ओर से अधिवक्ता एस. बी. नरवडे ने पैरवी की।
