मायावती, आकाश आनंद, ईशान आनंद और चंद्र शेखर (फोटो- सोशल मीडिया)
लखनऊः उत्तर प्रदेश के नक्शे पर जिस सियासी दल का रंग चढ़ गया, उस पार्टी को सियासत का उगता सूरज कहा जाता है। क्योंकि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। करीब 15 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश में मायावती को सियासत में उगते सूरज की तरह देखा जाता था। वह मुख्यमंत्री बनने वाली पहली दलित महिला हैं। तेजी से बढ़ते उनके राजनीतिक कद के चलते सियासी पंडित मायावती को प्रधानमंत्री मटेरियल मानने लगे थे। उत्तर प्रदेश में करीब दो दशक तक पिछड़ों की राजनीति करने वाली समाजवादी पार्टी और दलितों की राजनीति करने वाली बसपा का एक छत्र राज रहा है। इन्हीं दोनों दलों में सत्ता हांसिल करने की जंग होती थी, लेकिन 2014 में यूपी की राजनीति ने अचानक से ऐसा रंग बदला की बसपा को अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
पिछले 3 लोकसभा और 3 विधानसभा चुनावों में पार्टी को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ रहा है। सीटों की संख्या दहाईं के आंकड़े को भी नहीं छू पा रही है। इसका मुख्य कारण पार्टी नेतृत्व में नए चेहरों की कमी व बदलती राजनीतिक के अनुरू खुद को न बदलना कहा जा रहा है। यही वजह है कि मायावती ने अब भतीजे आकाश आनंद के बाद दूसरे भतीजे ईशान आनंद को बसपा की खोई जमीन वापिस लाने की जिम्मेदारी दी है।
आकाश आनंद की तरह ईशान की सियासी एंट्री
मायावती के जन्मदिन पर 15 जनवरी को ईशान आनंद अपने भाई आकाश आनंद के साथ दिखे थे। इससे पहले किसी भी कार्यक्रम में सिर्फ आकाश आनंद ही दिखाई देते थे। ईशान आनंद का मायावती के जन्मदिन पर दिखना उनकी सियासत में एंट्री के संकेत के रूप में देखा गया। क्योंकि इससे पहले आकाश आनंद भी पहली बार मायावती के जन्मदिन पर उनके साथ दिखे थे। इस संकेत की पुष्टि तब हुई जब आकाश के साथ ईशान बसपा के संगठन विस्तार के लिए आयोजित बैठक में शामिल हुए।
मायवती के जन्मदिन पर आकाश आनंद और ईशान आनंद
मायावती ने एक तीर से किए दो शिकार
बहुजन समाज पार्टी में अब तक अपने परिवार से सिर्फ मायावती ही थी। अब उन्होंने ईशान-आकाश की राजनीति में एंट्री करवाकर पार्टी में परिवार वाद की नींव रख दी है। इस बात के संकेत भी दिए हैं कि बसपा की पावर सेंटर मायावती ही रहेंगी और उनके उत्तराधिकारी उनके भतीजे होंगे। इससे पार्टी की पावर हमेशा परिवार में रहेगी। मायावती के इस कदम से पार्टी के महत्वाकांक्षी नेताओं को एक तरफ अपनी जगह और कद का पता चल गया तो दूसरी तरफ चंद्र शेखर से मुकाबले के लिए 2 नए चेहरे मिल गए।
दलित युवाओं में तेजी बढ़ती चंद्र शेखर की लोकप्रियता की काट के रूप में ईशान-आनंद को देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में तेजी से मायावती के वोट बैंक में चंद्र शेखर सेंध लगा रहे हैं। उनकी एंग्री यंग मैन वाली छवि युवाओं को काफी पसंद आ रही है। वह दलितों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ स्वंय मौके पर पहुंचते हैं। अब बसपा में चंद्र शेखर के मुकाबले में दो युवा चेहरे होंगे। जिनको बसपा की खोई जमीन वापिस लाने की जिम्मेदारी मायावती ने सौंपी है। बसपा नेता चाहते हैं कि चंद्र शेखर की तरह ही पार्टी के नेता जमीन पर उतर कर दलितों की आवाज उठाएं।
आकाश आनंद, ईशान आनंद और सांसद चंद्र शेखर आजाद
जमीन पर उपस्थित दर्ज करवाएगी बसपा
पार्टी सूत्रों का कहना है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद आकाश आनंद का मार्च से जिलों में कार्यक्रम लगाया जाएगा। उनके साथ ईशान आनंद को भी भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है। जिले-जिले कार्यक्रम लगाकर लोगों के बीच आकाश को भेजकर युवाओं के साथ समाज के लोगों को पार्टी से बांधे रखने का अभियान शुरू किया जाएगा। जल्द ही आकाश के साथ ईशान भी इस अभियान से जुड़ें और सड़कों पर उतर कर दलितों के संघर्ष की नई कवायद दिखाई दे तो हैरत नहीं।
दलित पॉलिटिक्स के उगते सूरज हैं चंद्रशेखर
उत्तर प्रदेश का दलित वोट बैंक, जो कभी बसपा के साथ एक जुट था अब बंटा हुआ नजर आता है। वोटिंग पैटर्न से पता चलता है कि 2014 से 2022 तक लोकसभा व विधानसभा चुनावों में ज्यादातर भाजपा के साथ था। वहीं 2024 के चुनाव में कांग्रेस और कुछ हद तक समाजवादी पार्टी के साथ गया, जिसमें कुछ सीटों पर चंद्रशेखर का भी प्रभाव देखने को मिला। अब इसी वोट बैंक को एक साथ लाकर बसपा से जोड़ने की आकाश-ईशान को जिम्मेदारी दी गई। यदि ऐसा नहीं कर पाए तो निश्चित तौर पर चंद्रशेखर के सियासी कद में तुफानी वृद्धि होगी। उन्हें पहले ही दलित पॉलिटिक्स का उगता सूरज कहा जा रहा है।