बकरीद पर मौलाना रजवी की बड़ी अपील: सिर्फ जायज मवेशियों की दें कुर्बानी, गाय की आस्था का करें सम्मान

Bakrid 2026 Guidelines: ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने बकरीद पर शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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मौलाना रजवी, फोटो- सोशल मीडिया
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Eid-ul-Adha Directives India: शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मुसलमानों से केवल इस्लाम में जायज मवेशियों की, कुर्बानी देने और दूसरे समुदायों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की अपील की है।

बकरीद (ईद-उल-अजहा) के आगामी त्योहार को देखते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं। मंगलवार को उन्होंने जोर देकर कहा कि यह त्योहार सदियों पुरानी परंपरा है, लेकिन इसे मनाते समय सामाजिक शांति और दूसरों की आस्था का ध्यान रखना अनिवार्य है।

जायज मवेशियों की दें कुर्बानी

मौलाना रजवी ने स्पष्ट किया कि इस्लाम में केवल उन्हीं जानवरों की कुर्बानी की अनुमति है जिन्हें धार्मिक रूप से 'जायज' माना गया है, जैसे बकरा और अन्य मवेशी। उन्होंने विशेष रूप से गाय का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में एक बहुत बड़ी आबादी गाय को 'माता' के रूप में मानती है और उनसे उनकी गहरी आस्था जुड़ी है। मौलाना के अनुसार, इस्लाम किसी की धार्मिक भावनाओं या विश्वास को ठेस पहुंचाने की इजाजत नहीं देता है, इसलिए हर धर्म की भावनाओं का सम्मान करना समाज के हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

भ्रांतियों को दूर करने की दी सलाह

इस्लामी संदर्भों का हवाला देते हुए मौलाना ने बताया कि इस्लाम में गाय के दूध को बेहद फायदेमंद और 'शिफा' (स्वास्थ्य देने वाला) बताया गया है, इसलिए इसका उपयोग स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे धार्मिक बातों को गलत तरीके से न समझें और किसी भी भ्रम की स्थिति से बचने के लिए इस्लाम का सही अध्ययन करें। अक्सर गलत जानकारी की वजह से ही समाज में तनाव पैदा होता है।

सरकारी नियमों का पालन और सार्वजनिक स्वच्छता के दिए निर्देश

त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौलाना ने कहा-

केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा त्योहारों के लिए बनाए गए नियमों का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है ताकि किसी को असुविधा न हो। उन्होंने सख्त हिदायत दी कि कुर्बानी खुले स्थानों पर न की जाए।

इसे केवल घर के अंदर, निर्धारित स्थानों या पारंपरिक जगहों पर ही अंजाम दिया जाना चाहिए। कुर्बानी के बाद उसे ढककर रखने की सलाह दी गई है ताकि किसी अन्य समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।

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