वृंदावन में धूमधाम से मना विजयदशमी पर्व, क्षत्रिय समाज ने किया पारंपरिक शस्त्र पूजन

Shastra Puja Vrindavan: वृंदावन में क्षत्रिय महासभा ने विजयदशमी उत्सव आयोजित किया। इस दौरान श्रीराम फार्म हाउस में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शस्त्र पूजन हुआ और संत-महात्माओं का सम्मान किया गया।
Vrindavan Vijayadashami Celebration: Kshatriya Mahasabha Organises Traditional Shastra Puja and Cultural Event
शस्त्र पूजन(सोर्स- नवभारत लाइव)
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Vrindavan Vijayadashami Celebration: असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक विजयदशमी पर्व को धर्मनगरी वृंदावन में धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर वृंदावन क्षत्रिय महासभा के बैनर तले सुनरख मार्ग स्थित श्रीराम फार्म हाउस में भव्य विजयदशमी उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ब्रज के चौरासी कोस क्षेत्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों से क्षत्रिय समाज के लोगों ने सहभागिता की। पारंपरिक शस्त्र पूजन, संत-महात्माओं के सम्मान और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से समाज ने अपनी गौरवशाली परंपराओं के संरक्षण तथा सामाजिक एकता का संदेश दिया। आयोजन में युवाओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। वक्ताओं ने सनातन संस्कृति, हिंदू धर्म और पारंपरिक रीति-रिवाजों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पारंपरिक शस्त्र पूजन

विजयदशमी उत्सव का शुभारंभ धार्मिक परंपराओं और संत-महात्माओं के स्वागत-सत्कार के साथ हुआ। कार्यक्रम में पहुंचे संत फूलडोल बिहारी दास महाराज, संत गोविंदानंद तीर्थ महाराज, बाबा बलराम दास, महंत लाडली शरण देवाचार्य महाराज सहित अन्य संत-महात्माओं का क्षत्रिय समाज के लोगों ने माल्यार्पण कर और पटुका पहनाकर सम्मान किया। संतों के सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक आस्था और पारंपरिक संस्कृति की झलक देखने को मिली।

 शस्त्र पूजन
शस्त्र पूजन(सोर्स- नवभारत लाइव)
Vrindavan Vijayadashami Celebration: Kshatriya Mahasabha Organises Traditional Shastra Puja and Cultural Event
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इसके बाद वेदपाठी विप्रों के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पारंपरिक शस्त्रों का विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन किया गया। क्षत्रिय समाज में विजयदशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा को साहस, शौर्य, कर्तव्य और धर्म की रक्षा के संकल्प से जोड़कर देखा जाता है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए उपस्थित लोगों ने शस्त्र पूजन किया और समाज की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

समाज की एकता और पुरानी परंपराओं के संरक्षण पर जोर

विजयदशमी उत्सव में वक्ताओं ने समाज की एकजुटता को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि पारंपरिक त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि वे समाज को अपनी संस्कृति, इतिहास और मूल्यों से जोड़ने का माध्यम भी हैं। ऐसे आयोजनों के जरिए नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों की परंपराओं, सामाजिक जिम्मेदारियों और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जा सकता है।

कार्यक्रम में क्षत्रिय समाज की गौरवशाली परंपराओं का स्मरण करते हुए सत्य, धर्म, न्याय और कर्तव्य के मार्ग पर चलने का आह्वान किया गया। समाज के लोगों ने आपसी भाईचारे और एकता को मजबूत बनाने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं से जोड़ने पर बल दिया।

आयोजन में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। पारंपरिक शस्त्र पूजन के दौरान युवाओं में उत्साह नजर आया। समाज के वरिष्ठ लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों को केवल आयोजनों तक सीमित न रखते हुए उन्हें जीवन के संस्कारों का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

 शस्त्र पूजन
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संतों के सम्मान से दिया धार्मिक समरसता का संदेश

कार्यक्रम में संत-महात्माओं का सम्मान आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। माल्यार्पण और पटुका पहनाकर संतों का स्वागत किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच आयोजित उत्सव ने वृंदावन की आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक सहभागिता की तस्वीर प्रस्तुत की।

विजयदशमी का पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के प्रसंग से जुड़ा है। इसे अहंकार, अन्याय और अधर्म के अंत तथा धर्म की स्थापना के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। क्षत्रिय समाज के लिए भी यह पर्व शौर्य, साहस, आत्मसम्मान और धर्म के प्रति समर्पण की परंपराओं को याद करने का अवसर माना जाता है। श्रीराम फार्म हाउस में आयोजित उत्सव के दौरान इन्हीं सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।

बड़ी संख्या में समाज के लोग रहे मौजूद

वृंदावन क्षत्रिय महासभा के तत्वावधान में आयोजित विजयदशमी उत्सव की अध्यक्षता ठाकुर हरिवल्लभ सिंह ने की। कार्यक्रम में ठाकुर जितेंद्र सिंह राणा, ठाकुर धर्मेंद्र पाल, ठाकुर उदय सिंह, ठाकुर वीरेंद्र सिसोदिया, ठाकुर लेखा सिसोदिया, ठाकुर ज्ञानी, शैलेंद्र चौहान, विजय सिंह दूध वाले, ठाकुर मुकेश सिंह सिकरवार और ठाकुर श्याम सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

इसके अलावा क्षत्रिय समाज के सैकड़ों लोगों ने कार्यक्रम में भाग लेकर पारंपरिक शस्त्र पूजन किया और एक-दूसरे को विजयदशमी की शुभकामनाएं दीं।

कुल मिलाकर, वृंदावन में आयोजित विजयदशमी उत्सव धार्मिक आस्था, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का अवसर बना। आयोजन के माध्यम से समाज ने संदेश दिया कि अपनी परंपराओं का सम्मान करते हुए सत्य, धर्म, न्याय और सद्भाव के मूल्यों को जीवन में अपनाना ही विजयदशमी पर्व की सार्थकता है।

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