Mathura: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले पर बोले शंकराचार्य सदानंद सरस्वती, हिंदू समाज से किया एकजुट होने का आह्वान

Shri Krishna Janmabhoomi Case: शंकराचार्य स्वामी सदानंद ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप से मुलाकात की, धार्मिक स्थलों के मुद्दे पर हिंदू समाज से एकजुट होने का आह्वान किया।
Shankaracharya Swami Sadanand Saraswati Calls for Unity on Shri Krishna Janmabhoomi Issue in Mathura
शंकराचार्य सदानंद सरस्वती(सोर्स- नवभारत लाइव)
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Highlights

  • विधर्मियों द्वारा नष्ट किए गए धर्मस्थलों वापस करने की मांग

  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण में हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह से मिले शंकराचार्य

  • हाईकोर्ट की सुनवाई पर भी ली जानकारी

  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि को बताया हिंदुओं की आस्था का केंद्र

Shankaracharya Sadanand Saraswati Statement: पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि विधर्मियों ने हमारे जिन धर्मस्थलों को नष्ट-भ्रष्ट किया है, वे हमें वापस मिलने चाहिए। उन्होंने हिंदू समाज से एकजुट होकर अपने धार्मिक स्थलों के लिए आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से सफलता अवश्य मिलेगी।

शंकराचार्य सोमवार को मथुरा के दावानल कुंड स्थित उड़िया बाबा आश्रम में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण में हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट से मुलाकात के दौरान अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।

चार बार क्षतिग्रस्त किया गया श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर

मुलाकात के दौरान महेंद्र प्रताप सिंह ने शंकराचार्य को श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण में हिंदू पक्ष की ओर से किए जा रहे प्रयासों, न्यायालय में चल रही सुनवाई और कानूनी पक्ष की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिंदू पक्ष का दावा है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को अलग-अलग ऐतिहासिक कालखंडों में चार बार क्षतिग्रस्त किया गया। हिंदू पक्ष के अनुसार, वर्ष 1670 में मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में मंदिर को तोड़कर उसके मूल गर्भगृह स्थल पर शाही ईदगाह का निर्माण कराया गया था।

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महेंद्र प्रताप सिंह ने यह भी बताया कि हिंदू पक्ष की ओर से भगवान श्रीकृष्ण के विग्रहों को आगरा ले जाने और वहां जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगवाए जाने का दावा किया जाता है। उन्होंने कहा कि मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य मंदिर निर्माण और आगरा से भगवान के विग्रहों को वापस लाने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में दो वाद दायर किए गए हैं। इन मुकदमों की पैरवी के लिए देश-विदेश की लाइब्रेरियों से ऐतिहासिक दस्तावेज, पुस्तकें और अन्य प्रमाण जुटाकर साक्ष्य तैयार किए गए हैं।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि हिंदुओं की आस्था का केंद्र

शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि आनंदकंद भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य स्थल हिंदू समाज की आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। यह एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है, जिसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को अपने धर्मस्थलों के विषय में एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए, ताकि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों का समाधान हो सके।

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अपनी बात समझाने के लिए शंकराचार्य ने कौए का उदाहरण देते हुए कहा कि कौआ नदी का पानी पीने के बजाय पास रखे घड़े में चोंच मारकर उसके जल को दूषित करने का प्रयास कर सकता है। इसी प्रकार, उनके अनुसार, विधर्मियों ने हिंदू धर्म और उसके धार्मिक स्थलों को दूषित करने का प्रयास किया। उन्होंने दोहराया कि जिन धर्मस्थलों को नष्ट-भ्रष्ट किया गया, उन्हें वापस मिलना चाहिए।

हाईकोर्ट की सुनवाई पर भी ली जानकारी

शंकराचार्य ने महेंद्र प्रताप सिंह से श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण में मंगलवार को उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई के बारे में भी जानकारी देने को कहा। उन्होंने हिंदू पक्ष की कानूनी कार्रवाई और आगे की प्रगति से अवगत कराने के लिए कहा।

इस मुलाकात को श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण से जुड़े हिंदू पक्ष के प्रयासों और धार्मिक नेतृत्व के बीच संवाद के रूप में देखा जा रहा है। इस अवसर पर वृंदावन स्थित उड़िया बाबा आश्रम, दावानल कुंड के प्रबंधक कुलदीप दुबे, हरीश अग्रवाल, रवि त्रिपाठी, मनोज चौधरी, भगत सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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