

Ramesh Baba Maharaj Last Rites Barsana: ब्रजभूमि के प्रख्यात गौसेवी और ब्रजनिष्ठ संत रमेश बाबा महाराज बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। बाबा की अंतिम यात्रा जब बरसाना की गलियों से निकली तो अपने प्रिय संत को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों ब्रजवासी और अनुयायी उमड़ पड़े। किसी की आंखों में आंसू थे तो किसी के अधरों पर हरिनाम संकीर्तन। माताजी गोशाला परिसर में मान मंदिर सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामजीलाल शास्त्री ने बाबा को मुखाग्नि दी।
संत रमेश बाबा के मंगलवार को गोलोकगमन के बाद उनका पार्थिव शरीर गहवरवन स्थित रस मंडप में अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया था। देर रात तक और बुधवार सुबह तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं ने उनके चरणों में पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
बुधवार सुबह गहवरवन के रस मंडप से बाबा की अंतिम यात्रा शुरू हुई। ब्रह्मांचल पर्वत की बड़ी परिक्रमा करते हुए यात्रा सुदामा चौक, रंगीली गली, मुख्य बाजार, होली टीला और चिकसौली रोड होते हुए माताजी गोशाला पहुंची। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने बाबा के पार्थिव शरीर की आरती उतारी। मंदिरों के सेवायत, गोस्वामी, संत और श्रद्धालुओं ने चंदन, प्रसादी माला, चुनरी और पटुका अर्पित कर श्रद्धा निवेदित की।
अंतिम यात्रा के दौरान पूरा बरसाना हरिनाम संकीर्तन से गूंजता रहा। हजारों अनुयायी नम आंखों से बाबा के साथ चल रहे थे। कोई हाथ जोड़कर अंतिम दर्शन कर रहा था तो कोई पुष्प अर्पित कर भाव-विह्वल नजर आया। बरसाना की गलियां उस संत को अंतिम विदाई दे रही थीं, जिसे ब्रजवासी लंबे समय से अपने परिवार के सदस्य और ब्रजधाम की अमूल्य धरोहर के रूप में मानते रहे हैं।
माताजी गोशाला पहुंचने के बाद वैदिक रीति-रिवाज से अंत्येष्टि संस्कार संपन्न कराया गया। मुखाग्नि के समय वातावरण बेहद भावुक हो गया। हजारों श्रद्धालु हरिनाम संकीर्तन करते रहे। संत समाज, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ब्रजवासी बाबा को अंतिम विदाई देने पहुंचे।
इस दौरान मान मंदिर के महंत ब्रजशरण दास महाराज, गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज, बलराम दास महाराज, मलूक पीठ के पीठाधीश राजेंद्रदास महाराज, माधवदास मौनी बाबा, ब्रजाचार्य पीठ के पीठाधीश उपेंद्र नारायण भट्ट, ललिता पीठ के पीठाधीश कृष्णानंद शरण सूसट महाराज, मान मंदिर सेवा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री, सचिव सुनील सिंह ब्रजदास, कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, जिलाधिकारी सीपी सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार सहित बड़ी संख्या में संत, जनप्रतिनिधि और ब्रजवासी मौजूद रहे।
संत रमेश बाबा का जीवन श्री राधा रानी की भक्ति, गौसेवा, ब्रज संरक्षण और प्रकृति सेवा को समर्पित रहा। उनके गोलोकगमन से ब्रज ने एक ऐसे संत को खो दिया, जिनका जीवन ब्रजभूमि और गौसेवा के लिए समर्पित रहा।
बुधवार को जब चिता की अग्नि ने उनके नश्वर शरीर को पंचतत्व में विलीन किया तो बरसाना की आंखें नम हो गईं। बाबा देह रूप में भले ही विदा हो गए, लेकिन उनकी साधना, गौसेवा और ब्रजप्रेम की स्मृतियां ब्रज की रज-रज में लंबे समय तक जीवित रहेंगी।