

Lawyers Clash Mathura Sadar Tehsil Premises: मथुरा सदर तहसील परिसर में उस समय हड़कंप मच गया, जब तहसीलदार कार्यालय के बाहर दो अधिवक्ताओं के बीच किसी विवाद को लेकर जमकर मारपीट हो गई। दोनों के बीच लात-घूंसे चलने लगे। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। मारपीट के दौरान दोनों के कपड़े तक फट गए।
बताया जा रहा है कि विवाद जचौदा गांव में चबूतरे को तुड़वाने से जुड़े मामले को लेकर हुआ। इसी विवाद के संबंध में दोनों अधिवक्ता तहसील परिसर पहुंचे थे। तहसीलदार कार्यालय के बाहर बातचीत के दौरान दोनों के बीच कहासुनी हो गई। देखते ही देखते कहासुनी ने उग्र रूप ले लिया और दोनों अधिवक्ता एक-दूसरे से भिड़ गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले दोनों के बीच तीखी बहस हुई। इसके बाद मामला हाथापाई तक पहुंच गया। दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे चले। आसपास मौजूद लोगों ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ देर तक मारपीट जारी रही। घटना के कारण तहसील परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
तहसील परिसर में हुई इस घटना ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। तहसील और न्यायालय परिसर ऐसे स्थान हैं, जहां आम लोगों को अपने विवादों के समाधान के लिए कानूनी प्रक्रिया और कानून के जानकारों पर भरोसा रहता है। ऐसे में यदि कानून की पैरवी करने वाले अधिवक्ता ही सार्वजनिक स्थान पर आपस में मारपीट करने लगें, तो यह निश्चित तौर पर चिंता का विषय है।
घटना के बाद तहसील परिसर में मौजूद अन्य अधिवक्ताओं और लोगों के बीच भी घटना को लेकर चर्चा होती रही। लोगों का कहना था कि विवाद चाहे कितना भी गंभीर क्यों न हो, उसे बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए। सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की मारपीट से न केवल माहौल बिगड़ता है, बल्कि आम लोगों के बीच भी गलत संदेश जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जहां कानून की पैरवी करने वाले लोग मौजूद हों, वहीं कानून और मर्यादा की सीमाएं कैसे टूट गईं? अब देखना होगा कि इस मामले में संबंधित अधिकारियों और बार एसोसिएशन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है।
फिलहाल, घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। मामले में दोनों पक्षों की ओर से क्या कार्रवाई की गई या पुलिस के पास कोई शिकायत दी गई है, यह संबंधित पक्षों के बयान और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।