Mathura: गोल्ड मेडलिस्ट से चाय बेचने वाला बना कराटे चैंपियन, घर के बाहर लिखा- ‘मेडल बिकाऊ हैं’

Mathura Champion Medal: इंटरनेशनल कराटे चैंपियन हरिओम शुक्ला आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। देश-विदेश में 60 से अधिक पदक जीत चुके हरिओम ने आर्थिक तंगी के कारण घर के बाहर मेडल बिकाऊ हैं का नोटिस लगाया है।
Mathura Karate Champion Struggles Financially, Puts International Medals Up for Sale
इंटरनेशनल कराटे चैंपियन हरिओम शुक्ला (सोर्स- फोटो नवभारत)
Published on: 
Updated on: 

Mathura International Karate Champion Medal Sale: जिस खिलाड़ी ने देश-विदेश की कराटे प्रतियोगिताओं में भारत का तिरंगा लहराया, जिसने गोल्ड, सिल्वर और कांस्य पदक जीतकर देश और मथुरा का नाम रोशन किया। आज वही खिलाड़ी परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहा है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे मथुरा के इंटरनेशनल कराटे चैंपियन हरिओम शुक्ला ने अपने घर के बाहर ऐसा नोटिस चस्पा किया है, जिसने खेल प्रतिभाओं के सामने मौजूद आर्थिक चुनौतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नोटिस पर लिखा है- “मेडल बिकाऊ हैं।”

मथुरा के कोसी खुर्द के मूल निवासी हरिओम शुक्ला वर्तमान में यमुनापार क्षेत्र के ईसापुर पानी की टंकी के पास रहते हैं। ब्लैक बेल्ट कराटे खिलाड़ी हरिओम ने अपने खेल जीवन में देश ही नहीं, विदेशों में भी कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और पदक हासिल किए। लेकिन आज आर्थिक हालात ऐसे हैं कि परिवार के भरण-पोषण के लिए उन्हें चाय की दुकान चलानी पड़ रही है। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में चाय की दुकान से होने वाली आमदनी से परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।

मेडल बेचने की नौबत क्यों आई?

हरिओम शुक्ला ने घर के बाहर लगाए गए नोटिस के पीछे अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि परिवार के पालन-पोषण के लिए पैसे जुटाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में उनके पास अपने वर्षों की मेहनत से हासिल किए गए गोल्ड, सिल्वर और कांस्य पदकों को बेचने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

इंटरनेशनल कराटे चैंपियन हरिओम शुक्ला
इंटरनेशनल कराटे चैंपियन हरिओम शुक्ला (सोर्स- फोटो नवभारत)
Mathura Karate Champion Struggles Financially, Puts International Medals Up for Sale
आगरा में क्रिकेटर दीपक चाहर के तीन बैट चोरी, वीडियो जारी कर बोले- पुलिस को बताऊं, योगी जी को या मोदी जी को?

उनका कहना है कि यदि कोई ऐसा कराटे खिलाड़ी है, जिसने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया लेकिन मेडल नहीं जीत पाया, तो वह उनसे मेडल खरीद सकता है। उनके मुताबिक इससे खरीदार को मेडल जीतने का अहसास होगा और उन्हें परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने में मदद मिल जाएगी।

हरिओम की यह बात उनकी आर्थिक स्थिति की गंभीरता को सामने रखती है। जिन पदकों को कभी उन्होंने अपनी मेहनत और उपलब्धि की निशानी के तौर पर संभालकर रखा था, आज वही उनके लिए परिवार का पेट पालने का संभावित जरिया बन गए हैं।

2006 में शुरू हुआ कराटे का सफर

हरिओम शुक्ला ने वर्ष 2006 में मथुरा से कराटे का सफर शुरू किया। वर्ष 2008 में उन्हें मुंबई के अंधेरी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में इंटरनेशनल लेवल पर खेलने का अवसर मिला। इसके बाद उनका सफर देश की सीमाओं से बाहर तक पहुंचा।

वर्ष 2010 में नेपाल के काठमांडू में आयोजित ओपन कराटे प्रतियोगिता में उन्होंने पहला गोल्ड मेडल हासिल किया। वर्ष 2013 में थाईलैंड के पटाया में आयोजित प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल कर गोल्ड मेडल जीता। इसी वर्ष सीनियर कैटेगरी में सिल्वर मेडल भी हासिल किया।

वर्ष 2015 में अमेरिका में आयोजित इंटरनेशनल प्रतिस्पर्धा में उन्होंने दूसरा सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके बाद श्रीलंका में पहला सीनियर गोल्ड और दूसरा ओपन सिल्वर मेडल हासिल किया। हरिओम के मुताबिक उन्होंने अपने खेल जीवन में 60 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गोल्ड, सिल्वर और कांस्य पदक जीते हैं।

इंटरनेशनल कराटे चैंपियन हरिओम शुक्ला के मेडल
इंटरनेशनल कराटे चैंपियन हरिओम शुक्ला के मेडल(सोर्स- फोटो नवभारत)
Mathura Karate Champion Struggles Financially, Puts International Medals Up for Sale
वाराणसी लोकसभा चुनाव निरस्त कर पुनः चुनाव कराने की मांग, कांग्रेस का कचहरी मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन

पिता बोले- विदेशों में देश का नाम रोशन किया, आज पदक किसी काम के नहीं

हरिओम के पिता दीनदयाल शुक्ला भी बेटे की स्थिति को लेकर व्यथित हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे ने विदेशों तक जाकर देश का नाम रोशन किया और अनेक पदक जीते, लेकिन आज आर्थिक तंगी के दौर में वही पदक किसी काम नहीं आ रहे हैं।

परिवार का आरोप है कि खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता और सम्मान देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन उनके बेटे को शासन-प्रशासन की ओर से अब तक कोई आर्थिक मदद नहीं मिली।

एक खिलाड़ी के घर के दरवाजे पर लगा “मेडल बिकाऊ हैं” का नोटिस केवल हरिओम की आर्थिक मजबूरी की कहानी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी छोड़ जाता है कि वर्षों तक देश का प्रतिनिधित्व करने वाली खेल प्रतिभाओं के लिए प्रतियोगिताओं के बाद रोजगार, आर्थिक सुरक्षा और सम्मान की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। आज हरिओम अपने पदकों के साथ खड़े हैं, लेकिन इस बार उन्हें किसी प्रतियोगिता में जीत नहीं, बल्कि परिवार के लिए दो वक्त की रोटी की जरूरत है।

इंटरनेशनल कराटे चैंपियन हरिओम शुक्ला का सर्टीफिकेट
इंटरनेशनल कराटे चैंपियन हरिओम शुक्ला का सर्टीफिकेट(सोर्स- फोटो नवभारत)
Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com