

Shyam Sunder Sharma joins Congress: उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय मथुरा के मांट विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री पंडित श्याम सुंदर शर्मा ने एक बार फिर कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। 3 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस में उनकी वापसी के बाद मथुरा से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
पंडित श्याम सुंदर शर्मा मांट विधानसभा सीट से आठ बार विधायक रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनके पिता का नाम स्वर्गीय पंडित लोकमणि शर्मा दर्ज है और उनके आठ बार विधायक चुने जाने की पुष्टि होती है।
कांग्रेस में वापसी के दौरान शर्मा ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि राजनीति का मतलब सेवा, परिश्रम और जनता के प्रति प्रतिबद्धता है। उन्होंने राहुल गांधी को मानववाद की राजनीति करने वाला नेता बताते हुए कांग्रेस में वापसी का कारण भी स्पष्ट किया।
कांग्रेस में शामिल होने के बाद पंडित श्याम सुंदर शर्मा की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात को भी राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी वापसी ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
शर्मा की वापसी से कांग्रेस के भीतर भी उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उत्तर प्रदेश में बड़े राजनीतिक बदलाव की बात कही है। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने भी पार्टी के अगले चुनाव को लेकर परिवर्तन की बात कही है।
मथुरा की राजनीति में पंडित श्याम सुंदर शर्मा का लंबा राजनीतिक अनुभव और मांट क्षेत्र में उनकी सक्रियता उन्हें कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण चेहरा बनाती है। हालांकि, उन्हें उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने या आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित किए जाने की अभी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चल रही इस तरह की चर्चाओं को फिलहाल अटकल और संभावित राजनीतिक रणनीति के तौर पर ही देखा जा रहा है।
कांग्रेस में वापसी के साथ ही अब मथुरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में पार्टी संगठन में पंडित श्याम सुंदर शर्मा की भूमिका और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।