यूपी की सियासत में फिर गूंजा किसान मुद्दा
राकेश टिकैत की महापंचायत से सरकार पर दबाव
खेती की लागत से लेकर भूमि अधिग्रहण के मुआवजे तक के उठाए सवाल
गन्ने की कीमत, बकाया भुगतान और धान खरीद जैसे मुद्दों को लेकर लखनऊ में किसानों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं। भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में गन्ना किसान संस्थान में जुटे किसानों ने साफ किया कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। किसान नेता राकेश टिकैत ने खेती की लागत, सरकारी खरीद और भूमि अधिग्रहण के मुआवजे जैसे मुद्दे उठाए और बोले अधिकारी बात अगर नहीं करवाई गई तो हम मार्च कर लेंगे।
लखनऊ स्थित गन्ना किसान संस्थान में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से किसान पहुंचे। महापंचायत में राकेश टिकैत बोले "गन्ने का मूल्य बढ़ाया जाए और पिछले साल का बकाया भुगतान किया जाए।" किसानों की मांग है कि गन्ने का रेट 600 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक तय किया जाए। साथ ही, मिलों पर बकाया भुगतान बिना देरी के कराया जाए, ताकि किसानों को अगली फसल की तैयारी में आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक करने और बकाया भुगतान जल्द कराने की मांग रखी।
महापंचायत में किसानों ने धान की खरीद में आ रही दिक्कतों पर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि सरकारी खरीद नहीं होने से किसान परेशान हैं और व्यापारी इसका फायदा उठा रहे हैं। किसानों ने मांग की कि धान की खरीद सुनिश्चित की जाए और उपज बेचने के बाद भुगतान में देरी न हो।
भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाले मुआवजे का मुद्दा भी उठा। किसानों का कहना है कि बढ़ाई गई दरें पर्याप्त नहीं हैं और उन्हें जमीन का उचित मूल्य मिलना चाहिए।
किसान मजदूर महापंचायत ऐसे समय में हुई है, जब गन्ना मूल्य, कृषि उपज की खरीद और किसानों की आय जैसे सवाल राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। किसानों की मांगें पूरी होती हैं या नहीं, इस पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
फिलहाल भारतीय किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। ऐसे में सरकार के सामने किसानों की समस्याओं का समाधान करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष को दूर करने की चुनौती भी रहेगी।
रिपोर्ट: ईशांक दीक्षित