मथुरा की कंठी-माला और अलीगढ़ की धातु मूर्तियों को मिला जीआई टैग, नाबार्ड के सहयोग से मिली नई पहचान

GI Tag News: मथुरा की कंठी-माला, अलीगढ़ की धातु मूर्तियों और दस्तगी-हस्तगी उत्पादों को जीआई टैग मिला है। नाबार्ड के सहयोग से इन पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेंगी।
Mathura’s Kanthi-mala and Aligarh’s metal sculptures receive GI tags; gain new recognition with NABARD’s support.
कंठी-माला और धातु मूर्तियों(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Aligarh Metal Statue GI Tag: बांके बिहारी की धरती मथुरा में बनने वाली कंठी माला सहित उत्तर प्रदेश के तीन नए उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) मिला है। इनमें अलीगढ़ में तैयार होने वाली धातु की मूर्तिया व दस्तगी-हस्तगी उत्पाद शामिल हैं।

इन उत्पादों को जीआई टैग दिलाने में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नाबार्ड ने इन जीआई उत्पादों के संवर्धन के लिए विभिन्न चैनल भागीदारों का सहयोग किया है।

नाबार्ड ने जीआई पंजीकरण दिलाने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा कि अब तक संस्था 176 उत्पादों को जीआई पंजीकरण प्राप्त कराने में सहयोग कर चुकी है। हाल ही में नाबार्ड ने देशभर के 28 नए उत्पादों को जीआई पंजीकरण दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जीआई पंजीकरण प्राप्त करने वाले इन नए उत्पादों में पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा वस्त्र, बांस शिल्प, धातु शिल्प, मिट्टी के बर्तन, चित्रकला तथा वाद्य यंत्रों सहित विविध श्रेणियाँ शामिल हैं। इससे भारत के क्षेत्र-विशिष्ट उत्पादों के पोर्टफोलियो को कानूनी संरक्षण मिलने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में उनकी संभावनाओं को भी और अधिक मजबूती मिली है।

देशभर के कई अन्य पारंपरिक उत्पाद भी शामिल

नाबार्ड अध्यक्ष के मुताबिक नए जीआई टैग वाले उत्पादों में अलीगढ़ के मेटल स्टैच्यू, दस्तगी-हस्तगी उत्पाद व मथुरा की कंठी माला के साथ ही बिहार की नालंदा बावनबूटी साड़ी एवं वस्त्र तथा गया पत्थरकट्टी शिल्प, झारखंड की कुचाई सिल्क साड़ी एवं वस्त्र, असम के बांस शिल्प और बिहू पेपा, हिमाचल प्रदेश का वुड कार्विंग शिल्प, तथा मध्य प्रदेश का खजुराहो धातु शिल्प सहित देशभर के कई अन्य पारंपरिक उत्पाद शामिल हैं।

डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा, “नाबार्ड उत्पादकों के सामूहिकीकरण, कौशल विकास, उद्यम संवर्धन, ब्रांडिंग, बाज़ार से जुड़ाव तथा निर्यात सुविधा के माध्यम से जीआई-आधारित मूल्य शृंखलाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि भारत की विशिष्ट विरासत स्थायी आर्थिक अवसरों में परिवर्तित हो सके।”

उन्होंने जानकारी दी कि नाबार्ड की जीआई-आधारित पहलों के माध्यम से 13,000 से अधिक कारीगरों और उत्पादकों को उच्च-मूल्य वाले घरेलू बाज़ारों से जोड़ा गया है, जिससे ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिली है और पारंपरिक उत्पादों की व्यावसायिक संभावनाओं में वृद्धि हुई है। नाबार्ड द्वारा समर्थित जीआई मूल्य शृंखलाओं और उनसे जुड़े उद्यमों के माध्यम से अब तक 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए गए हैं।

नाबार्ड अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक और गुजरात में विभिन्न जीआई उत्पादों के उत्पादन एवं संवर्धन के लिए कुल 14 ग्रामीण उद्यम उत्पादक संगठन कार्यरत हैं।

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