चर्चित इंद्रदेव सिंह हत्याकांड: 23 साल बाद आया फैसला, तीन दोषियों को उम्रकैद और ₹1.5 लाख जुर्माना
Indradev Singh Murder Case: लखनऊ के चर्चित इंद्रदेव सिंह हत्याकांड मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
- Written By: दिव्या सिंह
नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह और उनके पिता इंद्रदेव सिंह (सोर्स- सोशल मीडिया)
Noida Police Commissioner Father Murder Case: लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता इंद्रदेव सिंह की हत्या मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने विक्रम यादव, पन्ना सिंह और बृजेश यादव को हत्या और साजिश का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा और जुर्माना लगाया। अदालत ने तीनों पर कुल ₹1.5 लाख का जुर्माना लगाया है। यह हत्या वर्ष 2002 में जमीन विवाद के चलते दिनदहाड़े की गई थी।
फैसले के दौरान अदालत में इंद्रदेव सिंह की पत्नी नयनतारा सिंह, बेटी लक्ष्मी सिंह और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे। मामले के छह आरोपियों में से तीन की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो चुकी थी।
दिनदहाड़े हुई थी हत्या
8 अगस्त 2002 को शाम करीब 4 बजे लखनऊ के कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज के पास अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद उनकी पत्नी नयनतारा सिंह ने पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
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सीबीआई जांच में नए तथ्य सामने आए और साल 2004 में आरोपपत्र दाखिल किया गया। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर तीन आरोपियों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी करार दिया।
जमीन विवाद बना हत्या की वजह
जांच में सामने आया कि करीब पांच बीघा जमीन विवाद को लेकर इस हत्या की साजिश रची गई थी। आरोप है कि एक बर्खास्त लेखपाल ने पूरी वारदात की योजना बनाई थी। घटना के दौरान बृजेश यादव स्कूटर चला रहा था, जबकि विक्रम यादव ने इंद्रदेव सिंह पर गोलियां चलाई थीं।
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अदालत ने साजिश और हत्या में उनकी भूमिका को सिद्ध मानते हुए तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही तीनों पर ₹1.5 लाख का जुर्माना लगाया है।
