

Keshav Prasad Maurya Statement on Akhilesh Yadav SIR: उत्तर प्रदेश की सियासत में जुबानी जंग एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। मौर्य ने 'SIR' मुद्दे पर विपक्ष द्वारा किए जा रहे विरोध को सिरे से खारिज करते हुए समाजवादी पार्टी को सीधे तौर पर 'अस्त होता हुआ सूरज' करार दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जिस तरह बिहार में राजद और देश में कांग्रेस की राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है, उससे भी कहीं बुरा हश्र आने वाले समय में सपा का होने वाला है।
केशव प्रसाद मौर्य की यह तल्ख टिप्पणी उस वक्त आई है जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जान गंवाने वाले बीएलओ के परिजनों से मिलने की तैयारी कर रहे हैं। मौर्य ने इस दौरे पर तंज कसते हुए कहा कि एसआईआर का यह पूरा कार्यक्रम पवित्र लोकतंत्र की मजबूती के लिए चलाया जा रहा है, लेकिन अखिलेश और उनकी पूरी पार्टी इसके खिलाफ झूठ फैला रही है। उन्होंने दावा किया कि बिहार चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के रास्ते पर चलने वालों का सफाया अब निश्चित है।
कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर चल रही कलह पर भी उपमुख्यमंत्री ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे भले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, लेकिन वे भी हर छोटे-बड़े फैसले के लिए 'हाईकमान' की ओर देखते हैं, जो बताता है कि पार्टी में लोकतंत्र नाम की चीज नहीं बची है। मौर्य ने विपक्ष की तुलना महाभारत के कौरवों से करते हुए कहा कि सपा, टीएमसी और कांग्रेस आपस में ही बंटी हुई हैं। उनके कर्म अच्छे नहीं हैं, इसलिए देश अब कांग्रेस मुक्त होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जनता अब समझ चुकी है कि ये दल सिर्फ सत्ता के लिए गठबंधन का नाटक कर रहे हैं।
केशव प्रसाद मौर्य ने इतिहास के पन्ने पलटते हुए नेहरू और इंदिरा गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू ने अपनी ही कमेटियों के वोटों की डकैती डालकर प्रधानमंत्री पद पाया था, वरना लौहपुरुष सरदार पटेल उस कुर्सी पर होते। उन्होंने कहा कि सपा और राजद ने 'बुलेट से बैलेट' लूटने की जो संस्कृति शुरू की थी और 'कनपटी पर कट्टा' रखकर राजनीति करते थे, उसे पहले ईवीएम ने रोका और अब एसआईआर उनकी फर्जी वोटों की राजनीति को पूरी तरह खत्म कर देगा। यही वजह है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल आज 'त्राहिमाम-त्राहिमाम' कर रहे हैं क्योंकि उनकी पुरानी धांधली वाली चालें अब नहीं चलने वाली हैं।