

Musanagar House Roof Collapse: कानपुर देहात के मूसानगर के जरसेन गांव में बुधवार रात भारी बारिश के चलते कच्चे मकान की छत भरभरा कर गिर गई। मलबे में दबकर सात वर्षीय बेटी पलक और एक वर्षीय बेटे लवी की मौत हो गई, जबकि पिता श्रीराम उर्फ मुकेश गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई।ग्रामीणों ने फावड़े और कुदाल से मलबा हटाकर तीनों को बाहर निकाला। घायल पिता को सीएचसी पुखरायां भेजा गया। हादसे की सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।
जरसेन गांव निवासी मुकेश कुमार अपने परिवार के साथ घर में सो रहे थे। लगातार हो रही बारिश के कारण कच्ची छत कमजोर हो गई थी। रात में अचानक छत भरभराकर नीचे गिर गई। छत के मलबे में मुकेश कुमार और उनके दोनों बच्चे दब गए। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया।
ग्रामीणों ने बिना देर किए मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया। काफी मशक्कत के बाद मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला गया। हालांकि, तब तक 7 वर्षीय पलक और 3 वर्षीय लविश की मौत हो चुकी थी। दोनों मासूम मिट्टी और मलबे में दब गए थे। बच्चों की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। वहीं, गंभीर रूप से घायल मुकेश कुमार को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हादसे की सूचना मिलते ही मूसानगर थाना प्रभारी अमित वर्मा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इसके अलावा एसडीएम और सीओ भोगनीपुर ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने हादसे की जानकारी जुटाई और मामले की जांच शुरू की। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को आवश्यक मदद उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
भारी बारिश के चलते कच्चे मकान की छत भरभरा कर गिर गई जिसमें दो मासूम बच्चों की मौत हो गई लेकिन इस पूरी घटना ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे और जर्जर मकान में रहने वाले लोगों को पक्के मकान बनवाने के लिए इस योजना के तहत वित्तीय सहायता दी जाती है।
वहीं मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत भी वित्तीय सहायता उन लोगों को प्रदान की जाती है जो किसी कारण वश केंद्र की सूची में छूट गए हो लेकिन ऐसे में कच्चे मकान की छत गिर जाना कहीं ना कहीं इन दोनों योजनाओं और इन दोनों योजनाओं को अमल में लाने के लिए लगाए गए प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल है कि जब ऐसी दो योजनाएं प्रदेश में संचालित है तो फिर यह मकान कच्चे कैसे रह गए।