ट्रैफिक से हार गई जिंदगी: तीन किलोमीटर के जाम में थम गई मासूम की सांसें, पिता की गोद में तोड़ा दम

Aligarh Khair Traffic Jam: खैर में करीब 2-3 किलोमीटर लंबे जाम में बीमार बच्ची को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। पिता बेटी को गोद में लेकर CHC की ओर दौड़ा, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
Aligarh Traffic Jam Turns Fatal as Sick Girl Dies Before Reaching Hospital
पिता की गोद में मासूम(सोर्स- फोटो नवभारत)
Published on
Updated on

Aligarh Girl Dies In Traffic Jam: देश के अलग-अलग हिस्सों से जाम में फंसे मरीजों की जिंदगी छिन जाने की खबरें सामने आती रही हैं। अलीगढ़ के खैर कस्बे से सामने आई एक ऐसी ही घटना ने व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां करीब दो से तीन किलोमीटर लंबे जाम में फंसने के कारण एक बीमार बच्ची समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकी। पिता की गोद में ही उसकी सांसें थम गईं।

खैर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के लिए निकला था पिता

बताया जा रहा है कि बच्ची पिछले काफी समय से बीमार थी और उसे लगातार तेज बुखार बना हुआ था। उसकी प्लेटलेट्स भी अचानक कम हो गई थीं। हालत बिगड़ने पर बच्ची का पिता उसे बाइक पर लेकर खैर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के लिए निकला था। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही खैर कस्बे में लगा लंबा जाम उसके रास्ते में दीवार बनकर खड़ा हो गया।

Aligarh Traffic Jam Turns Fatal as Sick Girl Dies Before Reaching Hospital
कैसे मिलता सरकारी योजनाओं का लाभ; जब अधिकारी ही था इतना लापरवाह, बिना सूचना दिए महीनों रहा गायब.. निलंबित

लंबे जाम में पिता लगातार लोगों से रास्ता देने की गुहार लगाता रहा

करीब दो से तीन किलोमीटर लंबे जाम में पिता लगातार लोगों से रास्ता देने की गुहार लगाता रहा। वह बताता रहा कि उसकी बच्ची गंभीर रूप से बीमार है और उसे तत्काल अस्पताल ले जाना है। मगर जाम में रास्ता नहीं मिल सका। जब बाइक आगे नहीं बढ़ी तो मजबूर पिता ने अपनी मासूम बेटी को गोद में उठाया और पैदल ही स्वास्थ्य केंद्र CHC की ओर दौड़ पड़ा।

बमुश्किल वह बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के यह बताते ही पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई।

फूट-फूटकर रोया..

अस्पताल में बेटी को गोद में लेकर वह फूट-फूटकर रोने लगा। उसकी आंखों के सामने कुछ देर पहले तक जिंदगी से जूझ रही बेटी अब हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थी।

इस घटना ने खैर कस्बे में आए दिन लगने वाले जाम और यातायात व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि अगर आपात स्थिति में किसी मरीज को समय पर रास्ता ही न मिले तो आखिर जिम्मेदारी किसकी होगी? जाम केवल वाहनों को नहीं रोकता, कई बार जिंदगी और मौत के बीच का रास्ता भी रोक देता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com