कानपुर केस में जब्त गाड़ी, फोटो- सोशल मीडिया
Lamborghini Accident Kanpur: उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए चर्चित लैंबॉर्गिनी हादसे में एक नया और नाटकीय मोड़ आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) सूरज मिश्रा की अदालत ने तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा की जब्त लग्जरी कार को रिलीज करने का फैसला सुनाया है, जिसके लिए एक रिकॉर्ड तोड़ अंडरटेकिंग मांगी गई है।
कानपुर के वीआईपी रोड पर लगभग तीन हफ्ते पहले, 7 फरवरी को एक भीषण सड़क हादसा हुआ था। यह हादसा उस समय चर्चा में आया जब एक तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी कार ने भैरोघाट चौराहे के पास कई लोगों को टक्कर मार दी। इस घटना में करीब छह लोग घायल हुए थे और एक बाइक सवार को भी चोटें आई थीं।
कार को शहर के बड़े तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा चला रहे थे। घटना के बाद शिवम का मौके से भागने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि, जमानती धाराएं होने के कारण कोर्ट ने शिवम को पहले ही रिहा कर दिया था।
पिछले 20 दिनों से कानपुर शहर के ग्वालटोली थाने में धूल फांक रही इस 15 करोड़ की लग्जरी लैंबॉर्गिनी कार को रिलीज करने के लिए बचाव पक्ष ने अदालत में अर्जी दाखिल की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, सीजेएम सूरज मिश्रा की कोर्ट ने कार मालिक को 8.30 करोड़ रुपये की जमानत और अंडरटेकिंग जमा करने का आदेश दिया है। यह राशि संभवतः शहर के न्यायिक इतिहास में किसी वाहन को रिलीज करने के लिए मांगी गई सबसे बड़ी रकमों में से एक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही वाहन को सुपुर्दगी में दिया जाएगा।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में काफी ड्रामा देखने को मिला। कार रिलीज करने की अर्जी पर सुनवाई से पहले दो अलग-अलग अदालतों ने इस मामले को लेने से ही इनकार कर दिया था। सबसे पहले एसीजेएम 7 की कोर्ट ने सुनवाई से मना किया, जिसके बाद मामला अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में भेजा गया, लेकिन वहां भी इसे सुनने से इनकार कर दिया गया। अंततः प्रशासनिक आदेश के तहत यह फाइल सीजेएम सूरज मिश्रा की कोर्ट पहुंची, जहां लंबी बहस के बाद कार की रिलीज का रास्ता साफ हुआ।
कोर्ट ने कार को रिलीज करने के आदेश के साथ ही कई ऐसी शर्तें लगाई हैं, जिनका उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लग सकता है। कोर्ट के आदेशानुसार, कार मालिक रिलीज होने के बाद न तो इस गाड़ी को किसी को बेच सकता है और न ही इसे किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर कर सकता है। इसके अलावा, कार के मूल रंग और रूप में किसी भी प्रकार का बदलाव करने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
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कोर्ट ने यह भी हिदायत दी है कि विवेचक या न्यायालय जब भी वाहन को पेश करने का आदेश देगा, मालिक को इसे अपने खर्च पर अदालत के समक्ष लाना होगा। यदि इन शर्तों में से किसी का भी उल्लंघन होता है, तो आवेदक को 8.30 करोड़ रुपये की पूरी राशि राज्य सरकार के पक्ष में जमा करनी होगी।