झांसी में 100 साल पुरानी बस्ती खाली कराने का अल्टीमेटम! नोटिस से मचा हड़कंप, लोगों ने कहा- कहां जाएंगे

Ganesh Madhiya Jhansi: गणेश मढ़िया मोहल्ले में सेना ने मकान खाली करने का नोटिस दिया है। वर्षों से रहने का दावा कर रहे परिवारों ने बेघर होने की आशंका जताते हुए जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।
Jhansi Eviction Row: Army Issues Notice to Families in Ganesh Madhiya, Residents Fear Losing Homes
झांसी (सदर बाजार थाना क्षेत्र स्थित गणेश मढ़िया)(सोर्स- नवभारत लाइव)
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Jhansi Army Eviction Notice: झांसी के सदर बाजार थाना क्षेत्र स्थित गणेश मढ़िया मोहल्ले में सेना की ओर से बस्ती खाली करने का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। कुंज वाटिका के पीछे कैंटोनमेंट क्षेत्र में रहने वाले परिवारों का दावा है कि वे यहां 100 साल से भी अधिक समय से रह रहे हैं और नियमित रूप से हाउस टैक्स भी जमा करते रहे हैं। आरोप है कि सेना ने 15 और 16 अक्टूबर तक मकान खाली करने का नोटिस दिया है। अब बेघर होने के डर से परिवारों में चिंता और आक्रोश है। लोगों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर राहत दिलाने की मांग की है।

दो दिन का अल्टीमेटम, परिवारों के सामने छत छिनने का डर

झांसी के गणेश मढ़िया मोहल्ले में इन दिनों अपने आशियाने को बचाने की चिंता लोगों के चेहरों पर साफ नजर आ रही है। यहां रहने वाले परिवारों का कहना है कि वे कई दशकों से इस बस्ती में रह रहे हैं। किसी की दो पीढ़ियां, तो किसी की तीसरी और चौथी पीढ़ी यहीं गुजर गई। अब अचानक मकान खाली करने के लिए दो दिन का समय दिए जाने से उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, दो दिन पहले सेना के जवान मोहल्ले में पहुंचे और मकान खाली करने का नोटिस दिया। लोगों का आरोप है कि उन्हें 15 और 16 अक्टूबर तक जगह खाली करने को कहा गया है। उनका कहना है कि इतने कम समय में परिवार, बच्चों और घरेलू सामान को लेकर वे आखिर कहां जाएंगे?

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‘खाली नहीं किया तो बुलडोजर से गिरा देंगे मकान’

बस्ती में रहने वाले लोगों का आरोप है कि सेना के जवानों ने मकान खाली नहीं करने पर बुलडोजर से निर्माण गिराने की बात कही। हालांकि, इस संबंध में सेना का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

स्थानीय निवासी हरिकृष्ण का कहना है कि मोहल्ले में करीब 40 मकान हैं। यहां रहने वाले परिवार लंबे समय से अपना जीवन बिता रहे हैं। उनका दावा है कि उनके परिवारों की तीसरी और चौथी पीढ़ी तक इसी जगह पर रह रही है। इसके बावजूद अब उन्हें बेदखली के नोटिस दिए जा रहे हैं और दो दिन में मकान खाली करने को कहा जा रहा है।

हरिकृष्ण के मुताबिक, सेना के कुछ जवान गाड़ियों से मोहल्ले में पहुंचे थे और अपने साथ नोटिस लेकर आए थे। लोगों का कहना है कि वे अपने घरों को बचाने के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं।

‘पति अपंग हैं, ऐसे में हम कहां जाएंगे?’

बस्ती में रहने वाली मुन्नी देवी की परेशानी भी इसी संकट से जुड़ी है। उनका कहना है कि सेना के जवान मकान खाली करने की बात कहकर गए हैं और ऐसा नहीं करने पर मकान तोड़ने की चेतावनी दी गई है।

मुन्नी देवी बताती हैं कि उनके पति बीमार हैं और अपंग हो चुके हैं। ऐसे में परिवार को लेकर कहीं दूसरी जगह जाना उनके लिए बेहद मुश्किल है। उनका कहना है कि वे अपना मकान खाली नहीं करना चाहतीं और प्रशासन से मदद की उम्मीद कर रही हैं।

वहीं, विमला का दावा है कि वह करीब 75 वर्षों से यहां रह रही हैं और एक टपरे में अपना जीवन बिता रही हैं। उनका आरोप है कि सेना के जवान उनसे नोटिस पर हस्ताक्षर कराकर ले गए और दो दिन में मकान खाली करने की बात कही।

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‘छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएं?’

स्थानीय निवासी राधिका का कहना है कि उन्हें भी मकान खाली करने का नोटिस दिया गया है। उनका आरोप है कि निर्धारित समय में घर खाली नहीं करने पर बुलडोजर चलाने की बात कही गई है।

राधिका ने सवाल उठाया कि छोटे-छोटे बच्चों को लेकर वे आखिर कहां जाएंगी? उनका कहना है कि या तो उन्हें यहां रहने दिया जाए या फिर मकान खाली करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए, ताकि परिवारों के सामने अचानक बेघर होने की स्थिति न बने।

हाउस टैक्स जमा करने का दावा, मंदिर की जमीन का भी हवाला

गणेश मढ़िया मोहल्ले के लोगों का दावा है कि वे कैंटोनमेंट बोर्ड में लगातार हाउस टैक्स जमा करते आए हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने यहां मंदिर की करीब साढ़े पांच एकड़ जमीन होने की बात भी कही है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से यहां रह रहे हैं और उनके पास अपने दावों से जुड़े दस्तावेज भी हैं। फिलहाल, इस मामले में सेना और कैंटोनमेंट बोर्ड का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

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