
कार को निकालने की कोशिश करती पुलिस और एसडीआरएफ की टीम, फोटो- सोशल मीडिया
Greater Noida Car Accident: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। गुरुग्राम में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार घने कोहरे के चलते सेक्टर-150 के एक गहरे जलमग्न प्लॉट में जा गिरी। इस हादसे ने स्थानीय प्राधिकरण की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में घने कोहरे के बीच एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मृतक की पहचान युवराज मेहता के रूप में हुई है, जो गुरुग्राम स्थित एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। सूत्रों के अनुसार, युवराज देर रात अपने दफ्तर से घर लौट रहे थे। कोहरे के कारण सड़क पर दृश्यता (visibility) बेहद कम थी, जिसके चलते उन्हें सड़क किनारे बने गहरे गड्ढे या खाली प्लॉट का अंदाजा नहीं हो सका। इसी दौरान उनकी कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे के नाले की बाउंड्री तोड़ते हुए सीधे पानी से भरे एक 70 फीट गहरे खाली प्लॉट में जा गिरी।
कार गिरने के बाद ठंडे पानी में फंसे युवराज ने अपनी जान बचाने की आखिरी कोशिश की और डूबती कार के भीतर से ही अपने पिता राजकुमार मेहता को फोन लगाया। उन्होंने कांपती आवाज में अपने पिता से कहा, “पापा, मैं पानी में फंसा हूं, बहुत ठंड लग रही है, जल्दी आ जाइए…”। यह उनके जीवन की आखिरी पुकार थी। इसके बाद वे लगातार मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन दुर्भाग्यवश कोहरे और सुनसान जगह के कारण समय पर कोई उनकी सहायता के लिए नहीं पहुंच सका। कुछ राहगीरों ने हादसे की आवाज तो सुनी, लेकिन पानी गहरा और ठंडा होने के कारण वे अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए और केवल पुलिस को फोन करते रहे।
इस हृदयविदारक हादसे के बाद स्थानीय निवासियों और मृतक के परिजनों में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटनास्थल पर लंबे समय से सुरक्षा इंतजामों का अभाव था। सड़क के किनारे न तो कोई रिफ्लेक्टर लगाए गए थे और न ही कोई चेतावनी बोर्ड मौजूद था, जिससे रात के अंधेरे और कोहरे में चालक को खाली प्लॉट की गहराई का पता चल सके। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि इस स्थान पर पहले भी कई छोटी-मोटी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन बार-बार की शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने इस जानलेवा प्लॉट को सुरक्षित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
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हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस, स्थानीय गोताखोर और एनडीआरएफ (NDRF) की टीम मौके पर पहुंची। करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद कार और युवराज के शव को बाहर निकाला जा सका। इस घटना के बाद मचे बवाल को देखते हुए प्रशासन और प्राधिकरण तुरंत हरकत में आए। जिस 70 फीट गहरे प्लॉट ने एक युवा इंजीनियर की जान ली, उसे अगले ही दिन आनन-फानन में कई टन मलबा और कूड़ा डालकर भरवा दिया गया। युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने दुख जताते हुए कहा कि अब इस कार्रवाई का कोई फायदा नहीं है; यदि प्राधिकरण ने समय रहते सुरक्षा उपाय किए होते, तो उनका बेटा आज जीवित होता। थाना प्रभारी नॉलेज पार्क के अनुसार, परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच के बाद लापरवाही के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।






