गोरखपुर से नितिन नवीन ने साधे कई सियासी निशाने, मिशन-2027 के लिए संगठन और सहयोगियों को दिया एकजुटता का संदेश

Nitin Nabin Gorakhpur Visit: नितिन नवीन का दो दिवसीय गोरखपुर दौरा पूरा हो गया। मिशन-2027 के तहत उन्होंने मुख्यमंत्री योगी , पंकज चौधरी, डॉ. संजय निषाद और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की।
Nitin Nabin's Gorakhpur Visit: BJP Strengthens Organization and Alliance Ahead of UP Elections 2027
नितिन नवीन(सोर्स- नवभारत लाइव)
Published on: 
Updated on: 

Highlights:

  • दो दिवसीय दौरे में पंकज चौधरी और संजय निषाद के आवास तक पहुंचे

  • पूर्व पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों को दी धार

  • दिल्ली-लखनऊ के बीच खींचतान की चर्चाओं के बीच संगठनात्मक एकजुटता का संदेश

Nitin Nabin Meeting With BJP Former Leaders: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अपना दो दिवसीय गोरखपुर दौरा पूरा कर वापस लौट गए हैं, लेकिन उनके इस दौरे के सियासी मायने आने वाले दिनों तक चर्चा में रहेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद और गोरक्षपीठ की राजनीतिक प्रभाव वाली धरती से नितिन नवीन ने मिशन-2027 के लिए संगठन को साधने, सहयोगी दलों के साथ तालमेल मजबूत करने और पार्टी के पुराने चेहरों को फिर से सक्रिय करने का संदेश दिया है। उनका यह दौरा महज संगठनात्मक बैठकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए पूर्वांचल की सियासत को लेकर भाजपा की गंभीरता भी सामने आई।

क्षेत्रीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र है गोरखपुर

गोरखपुर और गोरक्षपीठ का पूर्वांचल की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं, वह केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति का भी एक महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र रहा है।

ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष का अपने दौरे की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन से करना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मंदिर परिसर में समय बिताना राजनीतिक दृष्टि से भी अहम रहा। इस दौरान योगी आदित्यनाथ उन्हें नाथपंथ की परंपरा और मंदिर के इतिहास से परिचित कराते नजर आए।

Nitin Nabin's Gorakhpur Visit: BJP Strengthens Organization and Alliance Ahead of UP Elections 2027
Exclusive: 2027 से पहले सपा का दलित महासम्मेलन, रामजीलाल सुमन बोले- मायावती से निराश लोग सपा के साथ आएंगे

दौरे का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू संगठन और गठबंधन को एकजुट रखने की कवायद रही। नितिन नवीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के आवास पहुंचे। इसके बाद भाजपा के प्रमुख सहयोगी दल निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के पादरी बाजार स्थित आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की।

इन मुलाकातों के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा अपने सहयोगियों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहती है। गोरखनाथ मंदिर से लेकर प्रदेश अध्यक्ष और सहयोगी दल के मुखिया के आवास तक पहुंचना महज शिष्टाचार नहीं, बल्कि राजनीतिक समन्वय का संकेत माना जा रहा है।

पूर्व जनप्रतिनिधियों और पूर्व पदाधिकारियों के साथ भी बैठक

नितिन नबीन ने पूर्व जनप्रतिनिधियों और पूर्व पदाधिकारियों के साथ भी बैठक की। इसके अलावा जनप्रतिनिधियों और संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ आगामी चुनाव की तैयारियों, संगठन की मजबूती और राजनीतिक चुनौतियों पर मंथन किया। स्पष्ट है कि पार्टी केवल मौजूदा संगठनात्मक ढांचे के भरोसे नहीं रहना चाहती, बल्कि पुराने कार्यकर्ताओं और अनुभवी चेहरों की भूमिका भी बढ़ाना चाहती है।

Nitin Nabin's Gorakhpur Visit: BJP Strengthens Organization and Alliance Ahead of UP Elections 2027
धीरेंद्र शास्त्री के बयान के बाद लखनऊ में पोस्टर वार, धर्म के सहारे 2027 की सियासी बिसात बिछाने में जुटे दल

इस दौरे का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पूर्वांचल को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को अपने इस प्रभाव क्षेत्र में कई मोर्चों पर चुनौती मिली थी।

ऐसे में 2027 से पहले गोरखपुर से संगठन को सक्रिय करने की कवायद के अपने मायने हैं। वहीं, भाजपा के भीतर दिल्ली और लखनऊ के बीच कथित राजनीतिक खींचतान की चर्चाओं के बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ लगातार कार्यक्रमों में मौजूद रहना और संगठन-सत्ता के प्रमुख चेहरों से मुलाकात करना एकजुटता का संदेश देता है।

कुल मिलाकर नितिन नबीन का गोरखपुर दौरा मिशन-2027 के लिए भाजपा की शुरुआती रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा सकता है। इस दौरे में संगठन, सरकार, सहयोगी दल और पुराने नेताओं को एक साथ साधने की कोशिश दिखी।

अब देखना होगा कि गोरखपुर से दिया गया यह एकजुटता का संदेश आगामी महीनों में जमीन पर संगठनात्मक सक्रियता और चुनावी रणनीति में कितना प्रभावी साबित होता है।