अमित शाह के विजय मंत्र से भाजपा में चुनावी जोश, लखनऊ में बनी विधानसभा चुनाव की रणनीति

Lucknow BJP Workers Energized: बैठक में उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े के साथ चारों सह प्रभारी भी मौजूद थे। चारों सह प्रभारियों के लिए नई जिम्मेदारियां भी इस बैठक के दौरान तय की गई।
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अमित शाह(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाने लखनऊ में बैठे पदाधिकारी

  • चुनाव से जुडी शंकाओं और उनके समाधानों पर हुआ विचार-विमर्श

  • बूथ स्तर तक संगठन को धार देने पर दिया जोर

BJP Party Officials Meeting: लखनऊ में भाजपा मुख्यालय में हुई प्रदेश पदाधिकारी की बैठक में संगठन की चुनावी रणनीति पर विचार विमर्श और मंथन हुआ। बीजेपी के उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावडे की अध्यक्षता में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह भी इस बैठक में मौजूद रहे। बैठक में मुख्य रूप से अमित शाह द्वारा शुक्रवार को दिए गए विजय मंत्रों को जमीन पर उतारने के लिए चिंतन हुआ। विधानसभा चुनाव से पहले बूथ स्तर तक संगठन को धार देने के लिए भी विचार विमर्श हुआ।

इस बैठक के जरिए पार्टी ने यह भी तय किया की उत्तर प्रदेश में विपक्ष की चुनावी रणनीति को कैसे निष्प्रभावी किया जाएगा। योगी सरकार की उपलब्धियां और केंद्र सरकार की सफलताओं को मतदाताओं तक किस रूप में पहुंचाया जाए ताकि इसका सीधा लाभ चुनाव में जीत के रूप में मिल सके। बैठक में उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े के साथ चारों सह प्रभारी भी मौजूद थे ।चारों सह प्रभारियों के लिए नई जिम्मेदारियां भी इस बैठक के दौरान तय की गई।

बैठक में मुख्य रूप से पार्टी संगठन को पूरी तरह से सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और विपक्ष की जातीय राजनीति का जवाब ढूंढने पर जोर दिया गया।

कई मुद्दों पर हुई चर्चा

शुक्रवार को कार्यसमिति की बैठक में अमित शाह के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके दोनों उपमुख्यमंत्री भी मौजूद थे लेकिन शनिवार को सिर्फ राज्य पदाधिकारियों की बैठक होने से राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि बैठक में मौजूद नहीं था।

खुले सत्र में राज्य के सभी जिला व महानगर अध्यक्ष, सभी मोर्चों के अध्यक्ष मौजूद रहे। इन तमाम पदाधिकारियों ने चुनाव को लेकर अपनी शंकाएं जाहिर कीं और उनके समाधान पर विचार किया गया।

बैठक में सबसे ज्यादा जोर बूथ स्तर तक पार्टी को चुनावी मोड में लाने पर दिया गया। हालिया विधान परिषद चुनाव में कई जगह पार्टी को इसी वजह से मात खानी पड़ी थी। दूसरा मुद्दा केंद्र और योगी सरकार की उपलब्धियों को मतदाताओं तक पहुंचाने का रहा। चर्चा में यह बात सामने आई कि वोटर पुरानी चल रही योजनाओं का आदी हो गया है इसलिए उसे नए सिरे से जागरूक करने की जरूरत है।

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असल मुद्दों पर ही जोर देने की सलाह

तीसरा बड़ा मुद्दा अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी की पीडीए रणनीति से जुड़ा था। पार्टी पदाधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'बंटोगे तो कटोगे' की भावना को निचले स्तर तक पहुंचाना जरूरी है। एमएलसी चुनाव को लेकर अखिलेश यादव के उस बयान पर भी चर्चा हुई जिसमें उन्होंने कहा था कि, 'हम 5 सीट जीते हैं मगर बीजेपी 50 जिले हार गई है।' पार्टी ने इसे हास्यास्पद और नकारात्मक बताया। कहा गया कि अगर पांच सीट जीत कर वे पचास जिलों पर दावा करते हैं तो हम तो 6 सीटें जीते हैं। इस तरह के प्रचार पर बयानबाजी से बचने की राय दी गई। अपने मुद्दों पर ही जोर देने की सलाह दी गई।

बैठक में सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी की बात ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए अधिकतम सक्रिय रहने पर भी जोर दिया गया। बैठक खत्म होते समय पदाधिकारियों में जैसा उत्साह दिखाई दिया उससे पता चलता है कि अमित शाह के विजय मंत्रों का उनमें भरपूर प्रभाव पड़ा है।हालांकि बीजेपी के सामने अभी चुनावी भगदड़ और नकारात्मक प्रचार जैसी बड़ी चुनौतियां भी आने वाली हैं और चुनाव जीतने के लिए उसे इनसे भी पार पाना होगा।

रिपोर्ट: गोविंद पंत 'राजू'

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