पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर, फोटो- सोशल मीडिया
Amitabh Thakur Bail Granted: उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चित रहे पूर्व आईपीएस और आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर के लिए शुक्रवार को राहत भरी खबर आई। वाराणसी की जिला अदालत ने उन्हें एक मानहानि मामले में जमानत दे दी है, लेकिन अन्य लंबित मामलों के चलते उनकी रिहाई फिलहाल टल गई है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को वाराणसी की एक स्थानीय अदालत से बड़ी कानूनी सफलता मिली है। जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया। यह मामला उनके खिलाफ वाराणसी के चौक थाने में दर्ज कराई गई एक प्राथमिकी (FIR) से संबंधित था, जिसमें उन पर सोशल मीडिया के माध्यम से व्यक्तिगत छवि को धूमिल करने का गंभीर आरोप लगाया गया था।
हालांकि, इस कानूनी जीत के बावजूद अमिताभ ठाकुर को अभी सलाखों के पीछे ही समय बिताना होगा, क्योंकि वे वर्तमान में देवरिया जेल में एक अन्य मामले में बंद हैं।
इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ें नवंबर 2024 के अंत में किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ी हैं। सूत्रों के अनुसार, 30 नवंबर 2024 को अमिताभ ठाकुर ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से कफ सिरप के अवैध कारोबार और उससे जुड़े संदिग्ध मामलों को लेकर एक पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट को लेकर वाराणसी के हिंदू युवा वाहिनी के नेता अम्बरीष सिंह ‘भोला’ ने तीखी आपत्ति जताई थी। ‘भोला’ का आरोप था कि अमिताभ ठाकुर ने बिना किसी ठोस प्रमाण के उन पर झूठे आरोप लगाए हैं, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। इसी शिकायत के आधार पर 9 दिसंबर को वाराणसी पुलिस ने मानहानि और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
सुनवाई के दौरान अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ता अनुज यादव ने अदालत के समक्ष कड़ा पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने या उसकी मानहानि करने की मंशा से पोस्ट नहीं किया था। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अमिताभ ठाकुर एक राजनीतिक दल के अध्यक्ष और एक पूर्व जिम्मेदार पुलिस अधिकारी हैं, और जनहित के मुद्दों को उठाना उनका नैतिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ठाकुर ने केवल कफ सिरप के संदिग्ध कारोबार की ‘उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच’ की मांग की थी, जिसे किसी की व्यक्तिगत मानहानि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुनने के बाद ठाकुर की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया।
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वाराणसी मामले में जमानत मिलने के बाद भी अमिताभ ठाकुर की रिहाई संभव नहीं हो पाई है। इसका मुख्य कारण देवरिया में दर्ज जमीन धोखाधड़ी का एक पुराना मामला है। सूत्रों के मुताबिक, ठाकुर फिलहाल देवरिया जेल में ही बंद हैं और जब तक उन्हें इस दूसरे मामले में जमानत नहीं मिल जाती, तब तक वे जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। उनके समर्थकों और आजाद अधिकार सेना के कार्यकर्ताओं को अब देवरिया की अदालत से राहत मिलने का इंतजार है।