

Delhi Varanasi Bullet Train Project News In Hindi: उत्तर प्रदेश में परिवहन और कनेक्टिविटी के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत राजधानी लखनऊ में बुलेट ट्रेन स्टेशन के सटीक स्थान को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच मंथन तेज हो गया है। हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में चार संभावित स्थानों को चिह्नित किया गया है, जिनमें से किसी एक पर जल्द ही अंतिम मुहर लगने की संभावना है।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 9 जून को हुई महत्वपूर्ण बैठक में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और अन्य विभागों के अधिकारियों ने स्टेशन के लिए चार विकल्पों पर चर्चा की। ये स्थान हैं:
तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के अनुसार, शहीद पथ-किसान पथ एक्सप्रेसवे और इकाना स्टेडियम के आसपास के विकल्पों को अधिक व्यावहारिक माना जा रहा है। इन क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की जटिलताएं कम हैं और निर्माण के दौरान शहर की मौजूदा यातायात व्यवस्था व बुनियादी ढांचे पर न्यूनतम असर पड़ने की संभावना है। इसके विपरीत, अन्य दो विकल्प अधिक चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे हैं। वृंदावन योजना में एसजीपीजीआई रोड के नीचे लगभग एक किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने की जरूरत होगी। वहीं, गोमती रिवरफ्रंट का विकल्प शहर के केंद्र के करीब होने के बावजूद बेहद जटिल है, क्योंकि वहां बड़े पैमाने पर यूटिलिटी शिफ्टिंग और लंबी सुरंग का निर्माण करना होगा।
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 812 किलोमीटर प्रस्तावित है। यह ट्रेन 350 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से दौड़ने में सक्षम होगी, जबकि इसकी परिचालन गति 320 किमी प्रति घंटा रखने का प्रस्ताव है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है। यह कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और भदोही होते हुए वाराणसी तक पहुंचेगा। इसके अलावा, लखनऊ से अयोध्या के लिए एक अलग 124 किलोमीटर लंबी शाखा लाइन भी विकसित की जाएगी।
बुलेट ट्रेन के शुरू होने से यात्रा समय में कॉफी बदलाव आएगा। अभी में दिल्ली से लखनऊ पहुंचने में कई घंटे लगते हैं, लेकिन बुलेट ट्रेन से यह सफर मात्र 2 घंटे में पूरा हो सकेगा। इसी तरह, दिल्ली से वाराणसी की दूरी 3 घंटे 50 मिनट और दिल्ली से अयोध्या का सफर 2 घंटे 50 मिनट में तय किया जा सकेगा। लखनऊ से अयोध्या जाने वाले यात्रियों के लिए यह सफर महज 25 से 30 मिनट का रह जाएगा। इसके अलावा, लखनऊ से प्रयागराज का सफर केवल 55 मिनट में किया जा सकेगा।
परियोजना का उद्देश्य न केवल यात्रा को सुगम बनाना है, बल्कि उत्तर प्रदेश के औद्योगिक, धार्मिक और पर्यटन केंद्रों को एक हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ना भी है। सरकार की योजना उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इस मेगा प्रोजेक्ट का शिलान्यास करने की है। अब सबकी निगाहें लखनऊ मेट्रो और अन्य एजेंसियों के साथ होने वाली अगली बैठक पर टिकी हैं, जहां स्टेशन के फाइनल लोकेशन पर फैसला लिया जाएगा।