सीएम योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों दिया तोहफा, अब 3 वर्ष में डिग्री कॉलेज के टीचर्स का गृह जनपद में ट्रांसफर संभव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चतर महाविद्यालों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने उच्चतर नियमावली में बदलाव किया है। जिससे 3 साल की सेवा के बाद शिक्षकों का गृह जनपद में ट्रांसफर हो सकेगा।
- Written By: Saurabh Pal
सीएम योगी आदित्यनाथ (सोर्स-सोशल मीडिया)
लखनऊः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चतर महाविद्यालों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नई उच्चतर सेवा नियमावली-2024 को मंजूरी दिये जाने के साथ ही सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों को पांच वर्षों की न्यूनतम सेवा के बजाय अब केवल तीन वर्षों की सेवा के बाद स्थानांतरण का अधिकार मिलेगा।
सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। जिसके तहत अब शिक्षकों को पांच वर्षों की न्यूनतम सेवा के बजाय केवल तीन वर्षों की सेवा के बाद स्थानांतरण का अधिकार मिल सकेगा।
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तीन वर्ष बाद गृह जिले में होगा ट्रांसफर
नई उच्चतर सेवा नियमावली-2024 के तहत प्रदेश के सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों में नियमित आधार पर नियुक्त और स्थायी रूप से पदस्थापित कार्यरत शिक्षक अब केवल तीन वर्षों की सेवा के बाद अपने ट्रांसफर की अर्जी डाल सकेंगे। इससे पहले समयावधि 5 साल थी।
समर्पण भाव से शिक्षक कर सकेंगे कार्यः उच्च शिक्षा मंत्री
इस फैसले से घर से दूर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सेवाएं दे रहीं महिला शिक्षकों को विशेष लाभ होगा, क्योंकि उन्हें अपने परिवार के पास वापस आने का अवसर पहले से कम समय में मिल सकेगा। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने संवाददाताओं को बताया कि इस नियमावली के लागू होने के बाद से शिक्षकों को अपने गृह जनपद में लौटने का अवसर मिलेगा, जिससे शिक्षण कार्य में अधिक समर्पण और प्रतिबद्धता आएगी।
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पूरे कार्यकाल में सिर्फ एकबार होगा ट्रांसफर
उन्होंने बताया कि इससे ना केवल शिक्षकों के कार्यस्थल पर संतोष का स्तर बढ़ेगा, बल्कि छात्रों को भी लाभ होगा। क्योंकि शिक्षक अधिक सहज और संतुष्ट होकर अपने कर्तव्यों का पालन कर सकेंगे। नई नियमावली के अंतर्गत यह प्रावधान भी है कि शिक्षक अपने संपूर्ण सेवा काल में केवल एक बार स्थानांतरण के हकदार होंगे।
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले लाखों की संख्या में अपने गृह जनपद से दूर शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों को लाभ होगा। वह अपने घर के पास अधिक समर्पण भाव से शिक्षण कार्य कर सकेंगे।
