प्रियंका गांधी के साथ इमरान मसूद, फोटो- सोशल मीडिया
Uttar Pradesh Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। लोकसभा चुनाव में साथ लड़ने वाली सपा और कांग्रेस के बीच 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर जुबानी जंग शुरू हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के तीखे बयानों ने गठबंधन के भविष्य पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। रविवार को दिए गए अपने बयान में मसूद ने सपा की ओर इशारा करते हुए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “जो लोग कह रहे हैं कि ‘हम कांग्रेस को इतनी सीटें देंगे’ – तुम हो कौन? तुमसे मांग कौन रहा है?”
मसूद का यह गुस्सा उस चर्चा की प्रतिक्रिया में आया है जिसमें सपा अक्सर गठबंधन के बड़े भाई के तौर पर कांग्रेस को सीमित सीटें देने की बात करती रही है। मसूद ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अब अपनी राजनीतिक जमीन खुद तैयार कर रही है और किसी के रहमोकरम पर नहीं रहना चाहती।
इमरान मसूद ने अपनी पार्टी को मजबूत करने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि कांग्रेस अब दूसरों की ‘बैसाखी’ पर नहीं चलेगी। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर तैयारी कर रही है।
यह केवल मसूद का व्यक्तिगत बयान नहीं है; इससे पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी कई मौकों पर 403 सीटों पर संगठन को मजबूत करने और अकेले चुनाव लड़ने के संकेत दे चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस साल होने वाले पंचायत चुनाव में भी कांग्रेस ने पहले ही अकेले मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया था। इमरान मसूद के इस ताजा बयान ने गठबंधन के बिखरने की आशंकाओं को और हवा दे दी है।
बीते लोकसभा चुनाव में ‘इंडिया गठबंधन’ के तहत सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में कांग्रेस को लंबे समय बाद संजीवनी मिली और वह उत्तर प्रदेश में 6 सीटें जीतने में कामयाब रही। कई अन्य सीटों पर भी कांग्रेसी उम्मीदवारों ने बेहद मजबूती से चुनाव लड़ा था।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि प्रदेश में कांग्रेस का संगठन अभी भी बहुत मजबूत स्थिति में नहीं है और विधानसभा में उनके पास केवल दो ही विधायक हैं। ऐसे में इमरान मसूद जैसे कद्दावर नेताओं द्वारा 403 सीटों पर लड़ने का दावा करना, असल में सपा पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है। पार्टी चाहती है कि आगामी चुनाव में उसे सपा से सम्मानजनक और अधिक संख्या में सीटें मिलें।
इमरान मसूद के इस धमाके के बाद अभी तक समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव या कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व (मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी) की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन के भीतर सीटों की सौदेबाजी के लिए एक रणनीतिक दबाव है।
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गौरतलब है कि इमरान मसूद को हाल ही में पार्टी के भीतर एक बड़ी जिम्मेदारी भी सौंपी गई है, जहाँ वे प्रियंका गांधी की मदद करेंगे। उनके बढ़ते कद और इस तरह के बयानों से साफ है कि कांग्रेस अब उत्तर प्रदेश में खुद को ‘जूनियर पार्टनर’ के रूप में देखने के लिए तैयार नहीं है।