अनिल राजभर और ओम प्रकाश राजभर।
Anil Rajbhar And Om Prakash Rajbhar Clash : उत्तर प्रदेश की सियासत में आज आजमगढ़ राजभर बनाम राजभर की जंग का अखाड़ा बन गया है। मौका है महाराजा सुहेलदेव राजभर की जयंती का, लेकिन मंजर पूरी तरह शक्ति प्रदर्शन में तब्दील हो चुका है। कुछ ही किलोमीटर के फासले पर योगी सरकार के दो कैबिनेट मंत्री-ओम प्रकाश राजभर (सुभासपा) और अनिल राजभर (बीजेपी) महारैली कर अपनी ताकत झोंक रहे हैं। यह सिर्फ जयंती का उत्सव नहीं, बल्कि समाज के असली नेता की साख की लड़ाई है।
बीजेपी के फायरब्रांड नेता अनिल राजभर ने रैली को संबोधित करते हुए सीधे तौर पर ओम प्रकाश राजभर के परिवारवाद पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मैं अकेला नहीं हूं, जनता का असीम प्यार मेरे साथ है। मेरे घर का कोई व्यक्ति राजनीति में नहीं है, समाज का हर भाई-बहन ही मेरा परिवार है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रबुद्ध वर्ग और ब्राह्मणों के साथ टकराव का जो नॉरेटिव ओम प्रकाश राजभर सेट कर रहे हैं, उसका कोई अर्थ नहीं है। जनता इस बार सपा के किले को ध्वस्त करने और भाजपा प्रत्याशियों को जिताने का मन बना चुकी है।
इन दोनों नेताओं के बीच 36 का आंकड़ा जगजाहिर है। हाल ही में अनिल राजभर ने एक मंच से ओम प्रकाश को समाज का सौदागर करार देते हुए चोर तक कह डाला था। इसके पलटवार में ओम प्रकाश राजभर ने बेहद तल्ख लहजे में चुनौती दी थी कि मां का दूध पिया है तो बताओ किस दुकान पर वोट बिकता है? आज की रैली इसी पुरानी रंजिश का अगला अध्याय मानी जा रही है।
दरअसल, ओम प्रकाश राजभर ने महीनों पहले इस रैली की तैयारी शुरू की थी। उनका प्रभाव मऊ, गाजीपुर और बलिया में तो है, लेकिन वे आजमगढ़ को अपना नया गढ़ बनाना चाहते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी आमंत्रित किया था, लेकिन उनके विदेश दौरे के कारण वे नहीं आ सके। जैसे ही ओम प्रकाश ने आजमगढ़ में रैली का बिगुल फूंका, अनिल राजभर ने भी वहीं मैदान संभालने का फैसला कर लिया ताकि यह संदेश न जाए कि राजभर समाज का नेतृत्व सिर्फ एक ही व्यक्ति के पास है।
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अनिल राजभर ने स्पष्ट किया कि आजमगढ़ में पिछले चुनाव में सपा का स्ट्राइक रेट भले ही शानदार रहा हो, लेकिन अब जनता विकास चाहती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और संस्कृति के लिए जान की परवाह नहीं करनी चाहिए, महाराजा सुहेलदेव हमें यही प्रेरणा देते हैं। वहीं दूसरी तरफ, ओम प्रकाश राजभर की महारैली में उमड़ी भीड़ यह बताने की कोशिश है कि पूर्वांचल के राजभर वोटों की चाबी आज भी उन्हीं के पास है।
आजमगढ़ की यह राजभर जंग आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति का रुख तय करेगी। क्या अनिल राजभर बीजेपी के लिए समाज को एकजुट कर पाएंगे या ओम प्रकाश राजभर अपना स्वतंत्र वजूद और मजबूत कर लेंगे? यह तो वक्त बताएगा, लेकिन आज आजमगढ़ की सड़कें राजभर राजनीति के रंग में पूरी तरह डूबी हुई हैं।