गोवर्धन पूजा पर CM योगी ने गोरखनाथ मंदिर में की गोसेवा, प्रकृति और गोवंश संरक्षण पर दिया ज़ोर
Goverdhan Puja in Gorakhnath Temple: मुख्यमंत्री ने गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर परिसर में स्थित गोशाला में विधि-विधान से पूजन किया और गोवंश की सेवा की। इस दौरान उन्होंने गोमाता को गुड़ खिलाया।
- Written By: दीपिका पाल
गोवर्धन पूजा पर CM योगी ने गोरखनाथ मंदिर में की गोसेवा ( सौ. सोशल मीडिया)
Goverdhan Puja 2025: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव के पावन अवसर पर देश और प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। सीएम योगी ने कामना की है कि सभी के जीवन में सदैव सुख और समृद्धि का आशीर्वाद बना रहे। इसके साथ ही साथ मुख्यमंत्री ने गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर परिसर में स्थित गोशाला में विधि-विधान से पूजन किया और गोवंश की सेवा की। इस दौरान उन्होंने गोमाता को गुड़ खिलाया।
सोशल मीडिया पर दी शुभकामनाएं
सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर लिखा, “गोवंश संवर्धन और प्रकृति संरक्षण के लोक-मंगलकारी संकल्प की पावन अभिव्यक्ति गोवर्धन पूजा की सभी श्रद्धालुओं एवं प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!”
गोवर्धन पूजा के मौके पर मुख्यमंत्री ने गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर परिसर में स्थित गोशाला में विधि-विधान से पूजन किया और गोवंश की सेवा की। इस दौरान उन्होंने गोमाता को गुड़ खिलाया।
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गोमाता हमारी आस्था एवं संस्कृति की आधार, प्रकृति, पर्यावरण और परंपरा की पोषक शक्ति हैं। भारत की कृषि प्रधान व्यवस्था की प्रतीक एवं गोवंश संवर्धन और प्रकृति संरक्षण के लोक-मंगलकारी संकल्प की पावन अभिव्यक्ति गोवर्धन पूजा के अवसर पर आज @GorakhnathMndr परिसर स्थित गोशाला में गोमाता… pic.twitter.com/bsJ1KxFDDZ — Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 22, 2025
गोसेवा के बाद सीएम योगी ने कहा कि गोमाता हमारी आस्था एवं संस्कृति की आधार, प्रकृति, पर्यावरण और परंपरा की पोषक शक्ति हैं। उन्होंने गोवर्धन पूजा को भारत की कृषि प्रधान व्यवस्था का प्रतीक बताया, जो गोवंश संवर्धन और प्रकृति संरक्षण के लोक-मंगलकारी संकल्प की पावन अभिव्यक्ति है।
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क्यों की जाती है गोवर्धन पूजा
पौराणिक कथा के अनुसार, दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा इसलिए की जाती है, क्योंकि इस दिन भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया था। यह पूजा भगवान कृष्ण के प्रति आभार व्यक्त करने और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता दर्शाने के लिए मनाई जाती है, जिसे अन्नकूट उत्सव के रूप में भी जाना जाता है। इस अवसर पर विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है।
