क्या 2027 में अखिलेश का खेल बिगाड़ेंगे चंद्रशेखर? पूरे यूपी में यात्रा निकालेगी ASP, सपा की बढ़ी टेंशन!

Chandra Shekhar Aazad UP Election State-Wide Yatra: चंद्रशेखर आजाद 2 जून से पूरे प्रदेश में यात्रा शुरु करेंगे। प्रदेशव्यापी यात्रा को लेकर पार्टी के कार्यकर्ता लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं।
Will Chandrashekhar spoil Akhilesh's game in 2027? The ASP is set to launch a statewide tour across UP—raising tensions for the SP!
चंद्रशेखर आजाद (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Chandra Shekhar Aazad UP Election 2027 Strategy: उत्तर प्रदेश में साल 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। चुनाव को देखते हुए नगीना से लोकसभा सांसद और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने प्रदेश के पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समंदाय मे अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए 2 जून 2026 से पूरे प्रदेश में यात्रा शुरु करेंगे। प्रदेशव्यापी यात्रा को लेकर पार्टी के कार्यकर्ता लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं। यात्रा पर जानकारी देते हुए ASP पार्टी के नेताओं ने बताया कि इस यात्रा के जरिए चंद्रशेखर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों को कवर करेंगे। उन्होंने बताया कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है।

सपा और कांग्रेस में हलचल

प्रदेश में चंद्रशेखर आजाद की बढ़ती लोकप्रियता के साथ-साथ राज्य में पार्टी का विस्तार करने की उनकी महत्वाकांक्षा ने सपा और कांग्रेस में हलचल की स्थिति पैदा कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में कुछ सपा सांसदों ने पार्टी मुखिया अखिलेश यादव से चंद्रशेखर के साथ बातचीत शुरू करने की अपील की थी। पार्टी सांसदों के इस सुझाव को अखिलेश यादव ने सिरे से खारिज कर दिया था। गौर करने वाली बात ये है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने पीडीए का नारा दिया था। पूरे चुनाव के दौरान अखिलेश ने पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों को ही टारगेट किया था। पार्टी को पीडीए का फायदा भी मिला था। लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने यूपी में बीजेपी का खेल बिगाड़ दिया था।

सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवार

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) आगामी विधानसभा चुनाव में कम से कम 100 सीटों पर ईबीसी उम्मीदवार उतारने की तैयीरी में है। साथ ही पार्टी 50 सामान्य सीटों पर भी दलित उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। पार्टी नेताओं के मुताबिक यह चुनाव दलितों, मुसलमानों और अति पिछड़े वर्ग समूहों पर पूरी तरह से केंद्रित होगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों को उनकी संख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। पार्टी का यह कदम विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ब्लॉक के लिए करारा जवाब माना जा रहा है।

प्रदेश में दलितों के बीच चंद्रशेखर के प्रभाव से सपा अवगत भी है। इसको देखते हुए पार्टी के कुछ लोग उनसे बातचीत करने के पक्ष में भी दिख रहे हैं। हालांकि, अखिलेश समेत पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस गठबंधन के पक्ष में नहीं है। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान सपा-कांग्रेस और एएसपी (कांशी राम) के बीच गठबंधन की अटकलें भी लगाई जा रही थी, लेकिन गठबंधन हो नहीं सका।

बसपा ने खोई जमीन

बता दें कि प्रदेश में बीजेपी के उभार के बाद से ही मायावती के नेतृत्व वाली बसपा लगातार रसातल में गई है। साल 2017 में जहां पार्टी का वोट शेयर 22.23% था, वहीं साल 2022 में यह गिरकर 12.88% पर आ गया। बसपा के मुख्य वोट आधार जाटव-रविदासी दलितों हैं। बसपा के कमजोर पड़ने पर प्रदेश में सपा-कांग्रेस ने इन समुदायों के बीच लगातार अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश की।

सार्वजनिक मंचों पर सपा-कांग्रेस द्वारा डॉ. बी.आर. अंबेडकर और कांशी राम का लगातार जिक्र भी किया जाने लगा। हाल ही में दोनों पार्टियों ने अंबेडकर की जयंती के अवसर पर पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन सबके बीच अब चंद्रशेखर आजाद की पार्टी भी मायाबती के वोट बैंक में सेंध लगाते दिख रहे हैं, जोकि सपा-कांग्रेस को असहज में डाल सकती है।

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