Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल का मायावती ने किया समर्थन, लेकिन 'कोटे के अंदर कोटा' पर अड़ीं

Women Reservation Bill: बसपा प्रमुख मायावती ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिना सब-कैटेगरी के यह बिल अधूरा है। उन्होंने SC/ST और OBC महिलाओं की हक की बात की हैं।
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बसपा सुप्रीमो मायावती, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Mayawati On Women Reservation Bill: भारतीय राजनीति के गलियारों में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) को लेकर हलचल तेज है। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस विधेयक को अपनी पार्टी का पूरा समर्थन देने का आधिकारिक ऐलान किया है। हालांकि, समर्थन के साथ ही उन्होंने दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण यानी कोटे के अंदर कोटा की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया है।

मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से महिलाओं को राजनीति में उचित भागीदारी देने के पक्ष में रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का कदम सराहनीय है, बशर्ते इसका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिलाओं तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि बसपा इस बिल का समर्थन करेगी क्योंकि हम चाहते हैं कि देश की आधी आबादी को कानून बनाने की प्रक्रियाओं में सशक्त भूमिका मिले।

कोटे के अंदर कोटा की रखा शर्त

बसपा प्रमुख ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिना सब-कैटेगरी के यह बिल अधूरा है। उन्होंने SC/ST और OBC महिलाओं की हक की बात की हैं। बसपा सुप्रीमो ने 33% आरक्षण के भीतर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए अलग से कोटा निर्धारित किया जाना चाहिए। अल्पसंख्यक महिलाओं की भागीदारी: मायावती ने मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं के लिए भी आरक्षण की वकालत की है।

बसपा सुप्रीमो का तर्क है कि यदि आरक्षण के भीतर आरक्षण नहीं दिया गया, तो केवल उच्च और प्रभावशाली वर्ग की महिलाएं ही इस कानून का लाभ उठा पाएंगी और शोषित वर्ग की महिलाएं फिर से हाशिए पर रह जाएंगी।

सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

समर्थन देने के बावजूद बसपा प्रमुख मायावती ने इस विधेयक को लागू करने की समयसीमा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जनगणना और परिसीमन की शर्तों के कारण इसे लागू होने में सालों लग सकते हैं, जो भाजपा की केवल चुनावी रणनीति मात्र प्रतीत होती है। उन्होंने मांग की कि इसे बिना किसी देरी के आगामी चुनावों से ही लागू किया जाना चाहिए।

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