खाना-पानी सब बंद, 24 घंटे का काम और पूरे महीने के पैसे सिर्फ 500 रुपए, UP में BLO बेहाल

BLO Problem: एसआईआर का शोर संसद से सड़क तक सुनाई दे रहा है। इस पर विवाद केवल राजनीतिक नहीं रह गया। यूपी समेत कई जिलों में इस प्रक्रिया को पूरा करने में लगे बीएलओ की मौत की घटनाएं भी सामने आई हैं।
BLO in trouble in UP
एसआईआर को लेकर जागरूक करते बीएलओ। इमेज-सोशल मीडिया
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SIR BLO News: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुआ विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अब उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में शुरू हो चुका है। इस कार्य में बूथ लेवल पदाधिकारी (BLO) को लगाया है। कई बीएलओ ने काम का दबाव बताते हुए आत्महत्या कर ली है।

उत्तर प्रदेश में जारी प्रक्रिया को लेकर भी चिंताजनक प्रतिक्रिया मिली है। वाराणसी में असल नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बीएलओ ने कहा कि खाना, पीना, बालों को कंघी करना सबकुछ बंद है।

24 घंटे की ड्यूटी

सिद्धार्थ नगर में एक अन्य महिला बीएलओ ने बताया कि हम लोग 24 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। डेडलाइन का दबाव, लगातार कॉल आना, आम लोगों की नाराजगी और अधिकारियों की डांट तक झेलनी पड़ रही है। इतना कुछ सहने के बाद भी पूरे महीने का इनाम सिर्फ 500 रुपए मिल रहा है।

कई तरह की चुनौतियां

बीएलओ ने बताया कि आधार से जन्म तिथि और माता–पिता का मिल नहीं रहा। बहुओं का डिटेल मिल नहीं रहा। गांव वाले 11–11 तारीख बोल रहे हैं। हमको तो सरकार ने 4 दिसंबर की अंतिम तिथि बताई है। यह भी कहा कि फॉर्म भी हम लोगों को समय पर नहीं मिल रहे हैं। ब्लॉक से समय पर फॉर्म कई बीएलओ को नहीं मिल पा रहे हैं। गाड़ी का साधन नहीं मिल रहा। पैदल कई किलोमीटर रोज गांवों में जाना पड़ता है।

मुख्य काम क्या होता है?

बीएलओ का काम मतदाता पहचान पत्र बनवाना होता है। इनके पास बूथ की जिम्मेदारी होती है। वह सभी वोटरों का वेरिफिकेशन करने की जिम्मेदारी संभालता है। बीएलओ घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करता है कि वहां 18 साल से ऊपर सभी लोगों का पहचान पत्र बना हो। किसी शख्स की मौत हो चुकी या वह पलायन कर चुका है तो ऐसे लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटवाना भी उनका कार्य है।

चुनाव आयोग ने कुछ और कर्मी लगाए

एसआईआर प्रक्रिया पूरी करने में बीएलओ का काम निर्वाचन आयोग के प्रिंट हुए Enumertion Form को लेकर इन्हें घर-घर पहुंचाना होता है। उस फॉर्म को भरवाना होता है। इसके बाद फॉर्म को लेकर ये डेटा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाता है। इसमें माता-पिता के नाम से फॉर्म की स्कैन कॉपी भरनी होती है। चुनाव आयोग ने इसके लिए कुछ और कर्मी लगाए गए हैं, जिससे बीएलओ पर काम का लोड न बढ़े। फिर भी कर्मियों के पास अधिक काम होने पर बीएलओ को ये काम करना होता है।

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