अयोध्या राम मंदिर के पहले CEO के लिए डिग्री काफी नहीं, भगवान राम में सच्ची श्रद्धा होना जरूरी
Ayodhya Ram Mandir: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले सीईओ पद पर नियुक्ति के लिए प्रशासनिक अनुभव के साथ भगवान राम के प्रति गहरी आस्था और सनातन परंपराओं की समझ होना अनिवार्य शर्त है।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
अयोध्या राम मंदिर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Ayodhya Ram Mandir Trust CEO: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई है। ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के चयन को लेकर गठित सर्च कमेटी ने स्पष्ट किया है कि इस पद पर किसी सरकारी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की जाएगी। कमेटी के अनुसार, सीईओ ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जिसे प्रशासनिक और प्रबंधन का व्यापक अनुभव हो, साथ ही वह भगवान राम के प्रति गहरी आस्था और मंदिर की परंपराओं की समझ रखता हो। इस निर्णय को लेकर अब व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
मंदिर मैनेजमेंट में मजबूत पकड़ हो
दरअसल कमेटी के सदस्य सुरेश हवारे ने कहा कि सबसे बड़ा उद्देश्य बात यह है कि राम मंदिर का कार्य सही और किसी संगठन (प्रोफेशनल एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्रक्च) के द्वारा चलाया जाए। मंदिर के ऐसा सीईओ सलेक्ट किया जाएगा , जो किसी प्रशासनिक और मंदिर की परंपराओं का अच्छे से पकड़ रखता हो, साथ ही प्रबंधन का व्यापक अनुभव हो।
सुरेश हवारे से पूछा गया कि मंदिर के CEO का पद किसी प्रसाशनिक अधिकारी या रिटायर्ड अधिकारी को मिल सकता है क्या। उन्होने जवाब देते हुए कहा कि इस पद के लिए एसी कोई शर्त नहीं रखी गई है। जो व्यक्ती इस पद के लिए काबिलियत रखता हो, इतने बढ़े मंदिर को चलाने का तजूर्बा रखता हो बह इस पद पर आवेदन कर सकता है।
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CEO के लिए करना होगा आवेदन
कमेटी सदस्य ने कहा कि अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद के पर चुनाव के लिए इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन मंगाया जाएगा,उम्मीदवारो के जांच किए जाएंगे। इसके बाद इंटरव्यू के लिए बुलाए जाएंगे, वही योग्य उम्मीदवारों को शार्टलिस्ट कर आगे कि प्रक्रिया (Process) को पूरा कर राम मंदिर ट्रस्ट के सामने पेश किया जाएगा।
कैसा होगा ट्रस्ट का पहला सीईओ?
ट्रस्ट कमेटी में कहा कि CEO पद के लिए किसी सरकारी अधिकारी को नहीं चुना जाएगा। सुत्रों से आई जानकारी के मुताबिक सीईओ के पद पर नियुक्त होने वाले व्यक्ति के पास सिर्फ डिग्रियां होना प्रयाप्त नहीं हैं। कमेटी के सदस्य सुरेश हावरे ने बताया कि नए होने वाले CEO की भगवान श्री राम के प्रति सच्ची श्रद्धा और आस्था होना बहुत जरूरी है। इतना ही नहीं वह पूर्ण रुप से सच्चा सनातनी और शिष्टाचार होना चाहिए। जिसके बाद उसकी प्रशासनिक योग्यता के आधार पर एक पैमाना तैयार किया जाएगा।
राम मंदिर के सीईओ में भगवान राम के लिए श्रद्धा जरूरी
सूत्रों के हवाले से बड़ी जानकारी सामने आई है कि अयोध्या राम मंदिर के पहले CEO) की नियुक्ति को लेकर तीन सदस्यीय टीम गठित कि गई है। मंदिर के सीईओ पद के लिए केवल प्रशासनिक अनुभव ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के प्रति गहरी श्रद्धा और आस्था भी अहम योग्यता मानी जाएगी। बताया जा रहा है कि इस नियुक्ति के लिए गठित तीन सदस्यीय चयन समिति के सभी सदस्यों के बीच फोन पर प्रारंभिक चर्चा हो चुकी है।
अब जल्द ही समिति की औपचारिक बैठक होगी, जिसमें सीईओ चयन के लिए न्यूनतम शैक्षणिक, प्रशासनिक और अन्य आवश्यक योग्यताओं पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद संभावित रूप से एक आधिकारिक विज्ञापन जारी किया जाएगा, जिसके माध्यम से इच्छुक उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन समिति उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेकर अंतिम नियुक्ति करेगी।
ट्रस्ट के पहले सीईओ का कैसै होगा चयन
सूत्रों के अनुसार, चयन प्रक्रिया में प्रशासनिक दक्षता, मंदिर प्रबंधन का अनुभव, पारदर्शिता, ईमानदारी और श्रीराम के प्रति श्रद्धा जैसे पहलुओं को विशेष महत्व दिया जाएगा। राम मंदिर ट्रस्ट का उद्देश्य ऐसे व्यक्ति का चयन करना है, जो मंदिर की गरिमा, परंपराओं और व्यवस्थाओं का प्रभावी ढंग से संचालन कर सके।
बता दें कि अबतक अयोध्या राम मंदिर के ट्रस्ट को कई सदस्यों के द्वारा मिलकर चलाया जा रहा था। चंपत राय इस ट्रस्ट के महासचिव थे। मंदिर में दान गड़बड़ी आने के बाद चंपत राय,गोपाल राव और अनिल मिश्रा तीनो इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं अब राम मंदिर की व्यवस्था सुचारु रुप से चलाने के लिए नए सीईओ की नियुक्ति की जाएगी।
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कौन हैं सुरेश हावरे, जो CEO चयन को लेकर रखी अहम शर्तें?
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद ट्रस्ट की व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया गया है। इस समिति में शामिल सुरेश हावरे का नाम इन दिनों चर्चा में है। सुरेश हावरे एक रिटायर्ड न्यूक्लियर साइंटिस्ट हैं, जिन्हें बड़े धार्मिक संस्थानों के प्रशासन और प्रबंधन का व्यापक अनुभव है।
सुरेश हावरे इससे पहले शिरडी के श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट के प्रमुख (Chief) रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में ट्रस्ट के प्रशासन, प्रबंधन और श्रद्धालुओं से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए कई अहम पहल की गईं। वर्तमान में वे श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के सदस्य भी हैं और धार्मिक संस्थानों के संचालन से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के चयन को लेकर सुरेश हावरे ने स्पष्ट किया है कि इस पद के लिए किसी सरकारी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की जाएगी। उनके अनुसार, उम्मीदवार के पास बड़े संस्थान के संचालन का अनुभव होना चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसके मन में भगवान श्रीराम के प्रति गहरी श्रद्धा और मंदिर की गरिमा के प्रति पूर्ण समर्पण होना चाहिए।
