अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में नया मोड़! BJP विधायक और RSS नेता पर गंभीर आरोप; कैसे खुला ये बड़ा राज?
Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले के खुलासे के बाद 'परत दर परत' नई जानकारियां सामने आ रही है। अब RTI कार्यकर्ता ने मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में हेराफेरी का आरोप लगाया है।
- Written By: मनोज आर्या
अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में नया खुलासा, ( AI जेनरेटेड इमेज)
Ayodhya Ram Mandir Offering Theft Case: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। अब मंदिर निर्माण के लिए चुटाए गए चंदा के पैसों की हेराफेरी के आरोप भी सामने आने लगे हैं। कर्नाटक के सामाजिक और RTI कार्यकर्ता दीपक पाटिल ने उत्तर प्रदेश विशेष जांच दल (SIT) को पत्र लिखकर भाजपा विधायक प्रभु च्वहाण और आरएसएस के एक प्रमुख अधिकारी के खिलाफ जांच की मांग की है।
कर्नाटक के बीदर जिले का रहने वाले दीपक ने आरएसएस के प्रमुख पदाधिकारी गोपालजी एवं कर्नाटक राज्य के बीदर जिले की औराद विधानसभा के वर्तमान भाजपा विधायक प्रभु चव्हाण ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण हेतु औराद तालुका के ठेकेदारों से बड़ी मात्रा में कथित रूप से अविवरणित (Unaccounted) दान राशि एकत्र की।
यूपी SIT को लिखे पत्र में कई गंभीर आरोप
अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी की जांच कर रही एसआईटी टीम को लिखे पत्र में कहा गया कि प्रभु चव्हाण तथा सतीश नवबाडे, जो गोपालजी के सहयोगी बताए जाते हैं, की संपत्ति एवं धन-संपदा में अत्यधिक वृद्धि हुई। इस कारण यह आशंका व्यक्त की जाती है कि श्रीराम मंदिर की कथित रूप से गबन अथवा दुरुपयोग की गई दान राशि का धन-प्रवाह (Money Trail) इन व्यक्तियों तक पहुंचा हो सकता है। अतः इस संबंध में विस्तृत जांच कर धन-प्रवाह का पता लगाया जाए।
सम्बंधित ख़बरें
राम मंदिर मामले में बड़ा खुलासा! भक्तों को फर्जी रसीद थमाकर ऐंठते थे लाखों का चढ़ावा, ऐसे होता था बंटवारा
नितिन नबीन के खास…और संगठन में मजबूत पकड़, कौन हैं अभिषेक कुमार? जिन्हें प्रशांत किशोर के सामने BJP ने उतारा
इस्तीफे से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होता, राम मंदिर ट्रस्ट पर AAP सांसद संजय सिंह का बड़ा हमला- VIDEO
राम मंदिर दान चोरी मामले में आरोपियों की 40 घंटे की पुलिस रिमांड, क्या खुल गए हैं कई अहम राज?
राम मंदिर निर्माण के लिए 5 लाख का चंदा
सामाजिक कार्यकर्ता ने पत्र में लिखा कि पिछले कई वर्षों से मैं भाजपा विधायक प्रभु चव्हाण की गतिविधियों पर नजर रख रहा हूं। मेरे संज्ञान में यह बात आई कि जब से उन्होंने आरएसएस के प्रमुख पदाधिकारी गोपालजी के साथ मिलकर अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण हेतु धन संग्रह (दान) अभियान चलाया, तभी से उनकी संपत्ति एवं धन-संपदा में अत्यधिक वृद्धि होने लगी। मुझे जानकारी प्राप्त हुई कि इन दोनों व्यक्तियों ने औराद तालुका के ठेकेदारों से प्रत्येक ठेकेदार से कम से कम 5 लाख रुपये अथवा उससे अधिक राशि दान के रूप में एकत्र की, जो बीदर जिले में सर्वाधिक बताई जाती है।
शिकायत के अनुसार यह दान राशि कथित रूप से अविवरणित थी तथा उनके नाम से बैंकर चेकों के माध्यम से प्राप्त की गई। बाद में सार्वजनिक अभिलेखों में कथित रूप से कम राशि प्रदर्शित की गई। शिकायत के अनुसार इस विषय पर प्रश्न उठाने वाले लोगों को ‘हिन्दू विरोधी; कहकर बदनाम किया गया, जिसके कारण कोई खुलकर इस विषय में प्रश्न नहीं उठा सका।
100 एकड़ बेनामी भूमि के भी आरोप
जब अयोध्या श्रीराम मंदिर की दान राशि के कथित वित्तीय दुरुपयोग एवं गबन से संबंधित समाचार सार्वजनिक हुए, तब मैंने इन व्यक्तियों की कथित बेनामी अचल संपत्तियों के संबंध में जानकारी एकत्र करना प्रारंभ किया। इस दौरान मुझे यह जानकारी प्राप्त हुई कि गोपालजी, विधायक प्रभु चव्हाण तथा उनके सहयोगी सतीश नवबाडे, जो ‘आदित्य डेवलपर्स’ नामक रियल एस्टेट व्यवसाय से जुड़े बताए जाते हैं, ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर बड़ी मात्रा में कृषि भूमि एवं अन्य अचल संपत्तियां अर्जित की हैं।
मेरे संज्ञान में यह भी आया कि इन व्यक्तियों द्वारा 100 एकड़ से अधिक कृषि भूमि कथित रूप से बेनामी रूप में अपने रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई। विशेष रूप से यह आरोप है कि विधायक प्रभु चव्हाण ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर अनेक भूमि संपत्तियां अर्जित की हैं। यह भी जानकारी प्राप्त हुई कि सतीश नवबाडे ‘आदित्य डेवलपर्स’ के माध्यम से कथित रूप से इन व्यक्तियों के लिए रियल एस्टेट का कार्य संचालित करते हैं।
‘चंदे के पैसे से संपत्तियों की हुई खरीदारी’
मेरे द्वारा एकत्रित जानकारी के अनुसार इन संपत्तियों की खरीदारी कथित रूप से श्रीराम मंदिर निर्माण हेतु दान संग्रह के पश्चात तथा मंदिर के उद्घाटन के बाद तेजी से हुई। साथ ही यह भी देखा गया कि विधायक प्रभु चव्हाण ने महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के विभिन्न जिलों में बाजार मूल्य से अधिक कीमत देकर लगातार कृषि भूमि खरीदना प्रारंभ किया। इससे आमजन में यह संदेह उत्पन्न हुआ कि इतनी बड़ी मात्रा में निवेश हेतु धन का स्रोत क्या था। यह भी जानकारी है कि उनके महाराष्ट्र राज्य के आरएसएस कार्यकर्ताओं से निकट संबंध रहे हैं।
यह भी पढ़ें: राम मंदिर दान चोरी मामले में आरोपियों की 40 घंटे की पुलिस रिमांड, क्या खुल गए हैं कई अहम राज?
उपरोक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों के आधार पर यह आशंका व्यक्त की जाती है कि यदि अयोध्या श्रीराम मंदिर की दान राशि का कहीं गबन अथवा दुरुपयोग हुआ है, तो उसका कुछ भाग कथित रूप से प्रभु चव्हाण एवं सतीश नवबाडे तक पहुंचा हो सकता है, जिन्होंने अल्प अवधि में महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के विभिन्न स्थानों पर बड़ी मात्रा में अचल संपत्तियां अर्जित की हैं। अतः इस दृष्टिकोण से भी विस्तृत जांच कर वास्तविक धन-प्रवाह (Money Trail) का पता लगाया जाना आवश्यक है। मैं संबंधित संपत्तियों एवं अन्य उपलब्ध दस्तावेजों का विवरण प्रस्तुत करने के लिए तैयार हूं।
