

लखनऊ: राजधानी लखनऊ के विकासनगर थाना क्षेत्र में कथित जुए के अड्डे पर छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किए गए 24 वर्षीय युवक की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर पीट-पीटकर हत्या करने का आरोप लगाया है। यह पहला ऐसा मौका नहीं है जब यूपी में पुलिस कस्टडी में आरोपी की मौत हुई हो। आए दिन ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। जो कहीं न कहीं सूबे की पुलिस योगी आदित्यनाथ के निजाम पर सवालिया निशान लगाते हैं।
फिलहाल इस मामले में लखनऊ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिसकर्मी शैलेंद्र सिंह समेत 3 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने इस मामले में चार धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने धारा 105, धारा 352, एससी-एसटी 3(1)(डी) और एससी-एसटी 3(2)(वी) के तहत मामला दर्ज किया है। यह एफआईआर देर रात करीब 1 बजे दर्ज की गई। क्या है पत्नी का दावा मृतक अमन कुमार गौतम की पत्नी रोशनी ने यह एफआईआर दर्ज कराई है।
मृतक अमन की पत्नी का दावा है कि उनके पति टहलने गए थे और अंबेडकर पार्क के पास कुछ दोस्तों के साथ बैठे थे। इसी दौरान कई पुलिसकर्मी आए और मेरे पति की पिटाई करने लगे। उन्होंने उसके साथ गाली-गलौज की। इतना पीटा कि वह बेहोश हो गया, जिसके बाद पुलिसकर्मी डर गए और उसे अपनी गाड़ी में अस्पताल ले गए।
अमन की पत्नी ने एफआईआर में दावा किया है कि महानगर सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन जब वह वहां गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जबकि शनिवार देर शाम जारी बयान में पुलिस ने दावा किया कि युवक की मौत हार्ट अटैक से हुई है।
अधिकारियों के मुताबिक जुआ खेलने की सूचना मिलने पर पुलिसकर्मियों की एक टीम ने शुक्रवार रात विकासनगर के सेक्टर 8 स्थित अंबेडकर पार्क में छापा मारा। एडीसीपी जितेंद्र कुमार दुबे ने शनिवार को बताया, "अमन गौतम (24) समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर हिरासत में ले लिया गया है।" अधिकारी ने कहा, "थाने ले जाते समय अमन की हालत बिगड़ गई और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।"
पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि पोस्टमार्टम जांच के जरिए मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा। शनिवार देर शाम जारी बयान में पुलिस ने बताया कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है और मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है। वहीं, दूसरी तरफ अमन की मौत को लेकर सियासी हंगामा मचने के भी आसार हैं। क्योंकि उत्तर प्रदेश में कस्टोडियल डेथ का ये पहला मामला नहीं है।