UP Police Compassionate Appointment: आश्रितों को देना भी होगा टेस्ट, इलाहाबाद HC ने बरकरार रखा 5 प्रतिशत कोटा

Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस में अनुकंपा नियुक्ति पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 5% कोटा और टेस्ट को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं।
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इलाहाबाद हाईकोर्टसोर्स- सोशल मीडिया
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UP Police Compassionate Appointment News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में पांच प्रतिशत कोटा और लिखित/ऑब्जेक्टिव टेस्ट की शर्त को वैध करार दिया है। कोर्ट ने इस व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृतक कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक सहारा देना है, न कि नियमित भर्ती प्रक्रिया को दरकिनार कर नियुक्ति का अधिकार प्रदान करना।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बड़ी संख्या में पद अनुकंपा के आधार पर भरने से खुली प्रतियोगिता के जरिए नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

सीधी भर्ती के पदों का अधिकतम 5 प्रतिशत कोटा

याचिकाओं में पुलिस विभाग में मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति के लिए निर्धारित पांच प्रतिशत कोटा और टेस्ट की व्यवस्था को चुनौती दी गई थी। याचियों का कहना था कि उत्तर प्रदेश उपनिरीक्षक एवं निरीक्षक (सिविल पुलिस) सेवा नियमावली, 2015 में की गई व्यवस्था नियमों के अनुरूप नहीं है।

इसके तहत हर साल सीधी भर्ती से भरे जाने वाले पदों में अधिकतम पांच प्रतिशत पद मृत पुलिसकर्मियों के आश्रित वर्ग के लिए अनुकंपा नियुक्ति के लिए आरक्षित किए जा सकते हैं।

आश्रित आवेदकों की संख्या अधिक होने पर टेस्ट का प्रावधान

नियमों के अनुसार यदि आश्रित श्रेणी में नियुक्ति के लिए प्राप्त आवेदनों की संख्या उपलब्ध रिक्त पदों से अधिक होती है तो अभ्यर्थियों को ऑब्जेक्टिव टाइप टेस्ट देना होगा। इसके साथ ही एक अभ्यर्थी को केवल एक ही अवसर दिए जाने की व्यवस्था है।

याचिकाकर्ताओं ने इसे अनुचित बताते हुए चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि वर्ष 1974 के उत्तर प्रदेश आश्रित नियुक्ति नियमों में ऐसी कोई सीमा निर्धारित नहीं है।

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खुली प्रतियोगिता के अभ्यर्थियों के हित भी जरूरी: कोर्ट

खंडपीठ ने अपने फैसले में पूर्व के ‘अंकुर गौतम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ (2019) मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि यह प्रतिबंध मनमाना या भेदभावपूर्ण नहीं है, बल्कि तर्कसंगत है। बड़ी संख्या में पद अनुकंपा नियुक्ति के आधार पर भरने से खुली प्रतियोगिता के जरिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए पांच प्रतिशत की सीमा और आवश्यकता पड़ने पर टेस्ट की व्यवस्था को उचित माना गया है।