

NEET UG Disability Quota: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिव्यांगता प्रमाण पत्र में मेडिकल बोर्ड और अपीलीय प्राधिकरण द्वारा दिव्यांगता प्रतिशत घटाए जाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने नीट-यूजी 2026 के अभ्यर्थी आलोक कुमार गुप्ता को राहत देते हुए उसके दिव्यांगता प्रमाण पत्र को मान्य माना और दिव्यांग श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश आलोक कुमार गुप्ता की याचिका पर दिया।
याचिकाकर्ता के पास 30 जून 2025 को जारी स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र था। इसमें मानसिक बीमारी के आधार पर उसकी 55 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाणित की गई थी। नीट-यूजी 2026 में दिव्यांग श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ लेने के लिए उसे मेडिकल बोर्ड से पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त करना आवश्यक था।
मेडिकल बोर्ड ने 12 अगस्त को जारी प्रमाण पत्र में याचिकाकर्ता की दिव्यांगता को घटाकर 40 प्रतिशत से कम कर दिया। इसके बाद मामला अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष गया। अपीलीय प्राधिकरण ने भी मेडिकल बोर्ड से सहमति जताते हुए दिव्यांगता प्रतिशत घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया। इससे याचिकाकर्ता दिव्यांग श्रेणी के तहत आरक्षण के लाभ से वंचित हो गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि दिव्यांगता प्रतिशत घटाने का निर्णय मेडिकल बोर्ड के अधिकार क्षेत्र से बाहर था। अदालत ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का हवाला देते हुए कहा कि प्रमाण पत्र जारी करने और उसके खिलाफ अपील की प्रक्रिया कानून में निर्धारित है। जब तक सक्षम प्रक्रिया के तहत प्रमाण पत्र को चुनौती देकर उसमें बदलाव नहीं किया जाता, तब तक वह प्रभावी और मान्य रहता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास पहले से जारी 55 प्रतिशत दिव्यांगता का स्थायी प्रमाण पत्र था। बाद में मेडिकल बोर्ड और अपीलीय प्राधिकरण द्वारा प्रतिशत घटाए जाने के आदेश को कोर्ट ने रद्द कर दिया। इससे अभ्यर्थी को नीट-यूजी 2026 में दिव्यांग श्रेणी के तहत आरक्षण का अधिकार मिल गया।
कोर्ट के फैसले से नीट-यूजी अभ्यर्थी को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैध प्रमाण पत्र को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बिना निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता। मेडिकल बोर्ड और अपीलीय प्राधिकरण के दिव्यांगता प्रतिशत घटाने संबंधी आदेश निरस्त कर दिए गए।